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विमान सौदे पर अब यूएस के साथ विवाद

नई दिल्ली.हाल में रक्षा सौदों पर हुए विवादों के बाद अब अमेरिका के साथ किए जा रहे करीब 5000 करोड़ रुपए के परिवहन विमान सौदे पर उंगली उठाई जा रही है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, विमानों की कीमत वाजिब से ज्यादा है।

तीन साल में कीमत दोगुनी

अमेरिकी सरकार के विदेश सैन्य कार्यक्रम (एफएमएस) के तहत होने वाले छह सुपर हक्यरूलिस विमानों के इस सौदे पर अभी बातचीत चल रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, तीन साल पहले तक सी-130जे हक्यरूलिस विमानों की कीमत करीब 7.5 करोड़ डॉलर थी, पर अब यही परिवहन विमान भारत को करीब 15 करोड़ डॉलर में खरीदना पड़ रहा है। भारी मात्रा में स्पेयर पार्ट व ट्रेनिंग मिलाकर छह विमानों का पूरा सौदा 1.2 अरब डॉलर (करीब 4800 करोड़ रुपए) का होगा।

सस्ता सौदा इटली का

इस बीच, इटैलियन कंपनी फिनमेकानिका ने हक्यरूलिस से अत्याधुनिक, लेकिन उससे कहीं छोटे आकार वाले परिवहन विमान को सिर्फ 3.5 करोड़ डॉलर में बेचने की पेशकश रखी है।

कंपनी का कहना है कि उनके सी-27जे विमान का चयन अमेरिकी सेना ने भी किया है और उनका विमान वह सब कर सकता है, जिसकी भारतीय सेना को जरूरत है। हक्यरूलिस की तुलना में इसकी खरीद व संचालन का खर्च बहुत ही कम है।

भारतीय वायु सेना के एक अधिकारी ने इटैलियन कंपनी के तर्क का समर्थन करते हुए कहा कि अब हमें देखना होगा कि रक्षा सौदों का एफएमएस तरीका लाभदायक है या नहीं।’

क्या है एफएमएस?एफएमएस के तहत सौदा सरकार से सरकार के स्तर पर होता है और इसमें निर्माता कंपनी सीधे शामिल नहीं होती। इस तरीके में भारतीय सरकार को टेंडर की जटिल प्रक्रिया नहीं अपनानी पड़ती, क्योंकि सौदे पर अमेरिकी सरकार का आश्वासन होता है।

भारत रूस के साथ रक्षा सौदों में भी यह तरीका अपनाता आ रहा है और फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी आगामी भारत यात्रा में हेलीकॉप्टर सौदे के लिए भी यही पेशकश रखने वाले हैं।





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