फूलों का गुलशन
यह फूलों का मौसम है। हर तरफ रंग-बिरंगे फूल और उनकी खुशबुएं बिखरी हैं। लगता है, मानो प्रकृति ने धरती का श्रंगार किया हो। बागों में बहार है और हर नजारे में खूबसूरती बेशुमार है। ऐसे मोहक-लुभावने मौसम में फूलों की बात तो छिड़नी ही है। धरती खिलखिला रही है, जैसा कि प्रख्यात अमेरिकी कवि राल्फ वाल्डो इमर्सन ने लिखा है कि पृथ्वी फूलों में हंसती है। फूल, जो हमेशा से सौंदर्य, भोलेपन और उमंग का प्रतीक रहे हैं।
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के एक शोध अध्ययन से साबित भी हुआ है कि फूलों के साथ जीना रोजाना के जीवन में ऊर्जा, जोश और खुशियों की बहार ला सकता है। दरअसल, दार्शनिक तो हमेशा से ही आश्चर्य करते रहे हैं कि अगर इंसान का फूलों से परिचय नहीं हुआ होता, तो हम खुशी का मतलब कैसे समझते!
इसलिए, हंसिए, खिलखिलाइए- बिल्कुल उन फूलों की तरह, जिनकी नजीर देकर अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि जॉन कीट्स ने कहा था कि आओ! हम पुष्पों की तरह अपनी पंखुड़ियां खोल दें और सबका स्वागत करें। रंग-बिरंगे, जिंदादिल और जीवन की आशा भरे फूलों से अपना तन-मन और समूचा जीवन महका लीजिए। फूल बारिश में जी-भर कर नहाते हैं, मंद बयार के साथ झूमते हैं और दुनिया को सिर्फ देते ही देते हैं। हां, फूल खुशबू और रंग के अलावा भी बहुत कुछ देते हैं।
फूल लो मुस्कान दोयह तो हम शुरू से ही जानते हैं कि वे हमें खुशदिल बनाते हैं, पर हाल के बरसों को छोड़कर इस बारे में कोई वैज्ञानिक अनुसंधान नहीं हुआ था। रटजर्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इस बारे में तीन अध्ययन किए हैं। पहले अध्ययन में 147 महिलाएं शामिल थीं। इनमें से जितनों को भी फूल मिले, उनके होंठों पर मुस्कान खिल गई। ध्यान दीजिए : सभी के होंठों पर। इसकी तुलना में, खूबसूरत मोमबत्तियां पाने वाली स्त्रियों में से 23 फीसदी नहीं हंसीं और स्वादिष्ट फल 10 प्रतिशत महिलाओं को मुस्काने पर मजबूर न कर सके।
जितने फूल उतनी हंसीयह तो हुआ सिर्फ एक अध्ययन। एक लिफ्ट में 122 महिलाओं और पुरुषों को या तो फूल, या एक पेन या कुछ भी नहीं दिया गया। फूल पाने वाले लोग ज्यादा मुस्कराए, ज्यादा बोले और सबसे रोचक बात, एक-दूसरे के ज्यादा करीब भी रहे। एक अन्य परीक्षण में 113 बुजुर्गो को फूलों के गुलदस्ते भेंट किए गए। सभी 113 को फूलों के साथ नोटबुक भी मिली थी, पर उनमें से कुछ को ये भेंट जरा पहले मिली और कुछ समय बाद उन्हें दुबारा फूल मिले, कुछ को तिबारा भी।
अनुमान लगाइए कि क्या हुआ होगा? बिल्कुल सही। ज्यादा फूल, यानी ज्यादा..और ज्यादा, ढेर सारी मुस्कान। रटजर्स के वैज्ञानिक टेरी मैकगुइर का मानना है कि खेती के लिए जंगलों की सफाई के दौरान फूलों का भी सफाया इसलिए नहीं हुआ, क्योंकि इंसान ने बजाय उजाड़ने के, उनके बाग लगाए। सुंदरता जीवन बचा सकती है, यह फूलों ने बखूबी साबित किया है।
फूल हैं तो बहार है
जीवन में फूलों का क्या महत्व है, यह साबित हुआ है हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के एक व्यवहार संबंधी अध्ययन से। इसके अनुसार :>> फूल करुणा और संवेदना उभारते हैं।
>> जीवन में फूलों की मौजूदगी ऊर्जा, उत्साह और खुशियों की बहार ला सकती है।
>> घर में फूल मूड को अच्छा करते हैं।
>> फूलों के साथ हफ्ता भर गुजारने वाले लोगों ने दया भावना में बढ़ोतरी महसूस की।
>>फूल दुश्चिंता और तनाव को दूर भगाते हैं।
>> अध्ययन में शामिल वे लोग, जिन्होंने फूलों के साथ वक्त बिताया, खुद के नकारात्मक भावों में क मी महसूस करने लगे।
पुष्प का गीत
मैं प्रेमी का उपहार हूं, विवाह का हार हूं,
मैं खुशी के एक पल की यादगार हूं,
मैं मृतक को जिंदगी का आखिरी उपहार हूं,
मैं आनंद और गम, दोनों का राजदार हूं।
पर मैं सिर्फ ऊपर देखता हूं प्रकाश के लिए,
और कभी नहीं झुकता अपनी परछाईं देखने।
यही वह बात है, जो मानव को सीखनी ही चाहिए।
(दार्शनिक खलील जिब्रान की रचना ‘सांग ऑफ द फ्लावर’ का अंश)