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फिल्में जजमेंट नहीं देती

चंडीगढ़फिल्म इंडस्ट्री में लोग अच्छी फिल्म बनाने से कतराते हैं..मैं बेशक 100 करोड़ की फिल्म नहीं बनाता लेकिन मैनें 4 करोड़ की फिल्म बनाकर भी अपनी फिल्मों के लिए ‘क्लास’ और ‘मास’ दोनों तरह की ऑडियंस क्रिएट की है।

मेरी फिल्में जजमेंट नहीं देती बल्कि यह फिल्में समाज का आईना हैं। यह कहना है बहुत ही कम समय में रीयलिस्टक सिनेमा बनाने के साथ 2 नेशनल अवार्ड जीत चुके मधुर भंडारकर का। अपनी नई फिल्म ‘फैशन’ की लोकेशन तलाशने के लिए शुक्रवार शाम को चंडीगढ़ पहुंचने के बाद मधुर ने ‘भास्कर’ से अपनी फिल्मों की तरह की खुली बात की।

मधुर कहते हैं कि मैं उस लेवल पर काम नहीं कर सकता जहां दूसरे की कहानी, विदेशी फिल्म की कॉपी करके या रीमेक पर फिल्म बनानी पड़े। रामगोपाल वर्मा के साथ अपने करिअर की शुरुआत करने वाले मधुर साफ कहते हैं कि ‘शोले’ एक बहुत ही खूबसूरत फिल्म है और अगर मैं रामगोपाल वर्मा की जगह होता तो ऐसा कभी नहीं करता।

अपनी हर फिल्म को वूमैन ओरिएंटिड बनाने के बारे में मधुर कहते हैं कि यह एक इत्तेफाक रहा कि मेरी हर फिल्म हिट रही। दरअसल, लोग कॉन्सेप्ट देखना चाहते हैं और मैनें वह चीज औरत के जरिए दिखाई। मधुर कहते हैं कि मैनें बहुत स्ट्रगल किया है और आज कामयाबी पाने के बाद खुश हूं।

बतौर प्रोड्यूसर अपनी नई पारी के बारे में मधुर कहते हैं कि यह कदम उठाना जरूरी था क्योंकि मैं ज्यादा लिबर्टी चाहता था। अगर मुझे लगा कि भविष्य में मेरी कहानी में बड़ा स्टार चाहिए तो मैं जरूर काम करुंगा लेकिन उसमें मधुर की ‘स्टैम्प’ जरूर दिखाई देगी। अभी भी मुझे कई बड़े सितारों की ओर से काम करने की ख्वाहिश रखी जाती है लेकिन मेरे पास ऐसी कोई कहानी नहीं है।





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