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सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल

दुर्ग. लैब में कंप्रेशन टेस्टिंग मशीन दो तरह की है। एक हाथ चलित व दूसरी विद्युत चलित। डामर की जांच के लिए बिटूमिन एक्सट्रेक्टर है। इसमें डामर का ग्रेड व सड़क में डामर का अनुपात पता चलता है। इस मशीन से डामर की जांच करने का दावा विभाग के अधिकारियों ने किया। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण में सही क्वालिटी का डामर ही इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन कई जगह सड़क से डामर के उखड़ने की शिकायतें मिली हैं।

अधिकारी सड़क के पिचकने व डामर के उखड़ने की कई अन्य वजह बताते हैं। गिट्टी की क्वालिटी जांचने के लिए इंपेक्ट वेल्यू मशीन है। कांक्रीट का कंप्रेशन फैक्टर टेस्ट करने की मशीन भी उपलब्ध है। बड़ी गिट्टी व पत्थर की मजबूती मापने की अलग मशीन है। ईंट की मजबूती परखने की भी मशीन उपलब्ध है। मौके पर जाकर सड़क निर्माण की जांच करने के लिए एक मोबाइल वैन भी है।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मौके पर जांच इंजीनियर व ठेकेदार की मौजूदगी में की जाती है। सड़क निर्माण में क्वालिटी का खास ध्यान रखा जा रहा है। रा-मटेरियल की जांच की जा रही है। सड़क निर्माण के लिए सीमेंट, रेत व गिट्टी के मिक्स करने के अनुपात की जांच भी मशीन से की जा रही है। लेकिन लैब टेक्निशियन नहीं होने से रिपोर्ट को लेकर संशय बना हुआ है।

जांच पर सवाल जिला पंचायत सदस्य कृष्णा साहू का कहना है कि अपनी सड़क की जांच खुद असिस्टेंट इंजीनियर करते हैं। ऐसे में बेहतर और निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। एक अन्य जिला पंचायत सदस्य भाईलाल डहरिया, खेदामारा-नंदौरी भिभौरी रोड का उदाहरण देते हैं। उनका कहना है कि 5 करोड़ की यह सड़क एक बारिश में खराब हो गया। सड़क निर्माण में पर्याप्त रा-मटेरियल का इस्तेमाल भी नहीं किया जाता। इसी वजह से सड़कें खराब होने की शिकायतें बढ़ी है।

डेढ़ महीना पहले जिला निगरानी समिति की बैठक हुई थी। जिसमें जन प्रतिनिधियों ने सड़क निर्माण में क्वालिटी को लेकर सवाल उठाए थे। कलेक्टर सुब्रत साहू ने सड़क निर्माण में क्वालिटी पर ध्यान रखने के निर्देश दिए थे। उसके बाद लैब में रा-मटेरियल्स की जांच में तेजी आई, लेकिन यह जांच खुद असिस्टेंट इंजीनियर ही कर रहे हैं।

ठेकेदारों के पास लैब नहीं

पीएमजीएसवाय (प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना) में सड़क निर्माण का ठेका लेने वाले ठेकेदारों के पास लैब नहीं है। जानकारी के मुताबिक ठेकेदारों के पास लैब होना जरुरी है। वे बगैर रा-मटेरियल की जांच के सड़क निर्माण कर रहे हैं। संबंधित एई एक-दो जगह का सेंपल लाकर विभागीय लैब में जांच कर रिपोर्ट ओके कर देते हैं।

सड़क निर्माण में क्वालिटी पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। दो अधिकारियों को लैब टेक्नीशियन की जिम्मेदारी दी गई है। असिस्टेंट इंजीनियर भी टेस्ट करते हैं। क्वालिटी, वेल्यू से बाहर होने पर मटेरियल रिजेक्ट कर दिया जाता है। मोबाइल वैन से भी जांच की जाती है।
आरएस शुक्ला, ईई, पीएमजीएसवाय





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