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प्लान में हरे हकीकत में निर्माणों से भरे

इंदौर. मास्टर प्लान-2021 में ग्रीन बेल्ट 9 से 11.5 प्रतिशत कर दिया गया लेकिन हकीकत कुछ और ही है। नगर निगम सीमा में बसी 792 कॉलोनी में से 432 अवैध हैं और ज्यादातर ग्रीन बेल्ट पर। ऐसे में प्लान क्रियान्वित करने वाली एजेंसियां इन्हें कैसे हरा रख पाएंगी कहना मुश्किल है?

प्लान के अनुसार ग्रीन बेल्ट में नदी, नाले, तालाब और कुछ चिह्नित क्षेत्र शामिल हैं। बड़े जलाशयों के आसपास 60 व छोटे से 30 मीटर तक निर्माण प्रतिबंधित है। इसमें बिलावली, सिरपुर, पिपल्यापाला, रालामंडल, पिपल्याहाना व असरावद खुर्द तालाब शामिल है। नदी के दोनों किनारों में 30 मीटर व नालों की स्थिति में भूमि विकास नियम-1984 के नियम 50(ख) के अनुसार खुला क्षेत्र छोड़ना होगा। इसके अलावा अहीरखेड़ी, सुखनिवास, खजराना का कुछ भाग, पीपल्यापाला, चोइथराम हास्पिटल के सामने, कबीटखेड़ी, एमआर-10 के पास व माणिकबाग रोड का हिस्सा शामिल है।

वास्तविक स्थिति

सिरपुर में निगम द्वारा कराए सर्वे में पता लगा कैचमेंट एरिया सैकड़ों भवनों व झुग्गियों से पटा है। खजराना में भी यही स्थिति है। चोईथराम के सामने मैरेज गार्डन व अन्य संस्थान बने हैं। अहीरखेड़ी-सुखनिवास में सैकड़ों कच्चे-पक्के निर्माण हैं। पीपल्यापाला क्षेत्र में संतनगर सहित कई कालोनियां हैं। वहां के लोगों ने आवासीय घोषित करने की मांग भी की थी।

कैसे हो क्रियान्वयन

सिरपुर तालाब के आसपास के निर्माण हटाना मुश्किल है। पर्यावरणविदों के अनुसार तालाबों में पानी आसपास बड़े क्षेत्र से संग्रहित होता है जबकि प्लान के मुताबिक 30 या 60 मीटर दूर तो निर्माण हो ही जाएंगे। महापौर कहती हैं ग्रीन बेल्ट पर हो चुकी बसाहट हटाना मुश्किल है।

अनुशंसाओं का पालन भी नहीं

आपत्तियों की सुनवाई समिति ने भी प्लान की इन विसंगतियों पर कुछ सुझाव दिए थे ताकि शहर में भी कुछ क्षेत्र ग्रीन दिखें। इसमें कुछ वृहद उद्यान का सुझाव भी था जो नहीं माना गया। विशेषज्ञों के मुताबिक प्लान-91 में प्रस्तावित ग्रीन बेल्ट भी नहीं बचाया जा सका। प्राधिकरण भी एकमात्र मेघदुत उपवन ही विकसित कर पाया। यह संभव है
निगम व प्राधिकरण ऐसे क्षेत्रों को चिह्नित कर सुरक्षा के कदम उठाएं।
तालाबों की जमीन के आसपास अतिक्रमण हटाकर बांउड्री वॉल बनाएं। सिरपुर के आसपास निगम ऐसा कर भी रहा है।
सामाजिक संस्थाओं व रहवासी संगठनों का सहयोग भी लिया जाए।
जनप्रतिनिधियों को भी उनके क्षेत्र के ग्रीन बेल्ट संरक्षित करने की जिम्मेदारी सौंपी जाए।

छोटे कॉलोनाइजर मुश्किल में

नए मास्टर प्लान ने छोटे कॉलोनाइजर को संकट में डाल दिया है। अब आठ हेक्टेयर से कम जमीन पर कॉलोनी विकसित नहीं की जा सकती। इसे देखते हुए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग कार्यालय से कई फाइलें लौटा दी जाएंगी। ऐसे कॉलोनाइजर मुख्यमंत्री से मिलकर राहत की गुजारिश करने वाले हैं।

सूत्रों के मुताबिक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग में ले-आउट मंजूरी के करीब 75 आवेदन ऐसे हैं जिनमें कॉलोनी आठ हेक्टेयर से कम की हैं। बदली परिस्थितियों में कॉलोनाइजर ज्यादा जमीन जुटाए या अन्य कॉलोनाइजरों से अनुबंध करे। दोनों ही स्थिति में समय व पैसा लगेगा। ऐसे कॉलोनाइजर सरकार से मांग करेंगे कि 31 दिसंबर 2007 तक जमा फाइलों का निराकरण पुराने नियम से ही किया जाए।

कई मामलों में भू-उपयोग भी बदल गया है। इस बारे में डायरेक्टर, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग दीप्ति गौड़ मुखर्जी का कहना है नियम सभी के लिए एक जैसे हैं। जनहित में उन्हें मानना ही चाहिए।





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