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अनाज और किराने की कीमतों में उछाल

रायपुर.anaj अनाज और किराना सिर्फ एक हफ्ते में 10 रुपए किलो तक महंगा हो गया। चावल, दाल और तेल की कीमतें सिर्फ पांच दिन में 7-10 रुपए किलो तक बढ़ गईं। अनाज-किराने की जबर्दस्त महंगाई से लोग हक्का-बक्का हैं। व्यापारी भी लोगों को ठीक तरह से नहीं समझा पा रहे हैं कि आखिर अनाज-किराना अचानक क्यों महंगा हुआ।

प्रधानमंत्री ने पिछले हफ्ते संकेत दिए थे कि अनाज की कीमतें बढ़ सकती हैं।इसके फौरन बाद यहां के बाजार में चावल, गेहूं, दालें और तेल की कीमतों ने तगड़ा उछाल मारा। खाने के तेल की कीमतें तो उफान पर हैं ही, ब्रांडेड तेल के भाव भी स्थिर नहीं हैं। अनाज व्यापारी भरत होतवानी ने बताया कि चावल पांच दिन में आठ रुपए किलो महंगा हो गया।

गेहूं के भाव दो रुपए और तेल की कीमत प्रति किलो 8 रुपए तक बढ़ी है। राहर दाल पिछले माह 38 रुपए किलो थी। नए साल में यही 44 रुपए बिक रही है। व्यापारी बताते हैं चावल में एचएमटी की मांग ज्यादा है। इसी के रेट सबसे ज्यादा बढ़े हैं।

मिडिल क्लास परेशान
: राशन की महंगाई से मिडिल क्लास परेशान है। बाजार में खरीदारी करने आई महिलाएं भी चावल, दाल और तेल की कीमतें सुनकर फूट पड़ती हैं। श्रीमती शालिनी देशमुख का कहना है कि उनके घर का बजट ही बिगड़ गया है। हर माह 200 रुपए तक का अतिरिक्त भार पड़ रहा है। यही स्थिति लगभग हर घर की है।

महंगाई की वजह
: थोक अनाज व्यापारी उमेश भांगला के मुताबिक छत्तीसगढ़ में गेहूं की आवक घट गई है। यहां प्रतिदिन मिल क्वालिटी के गेहूं की खपत 450 टन और उच्च क्वालिटी के गेहूं की 150 टन है। उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश से गेहूं मंगाया जाता है। उत्तरप्रदेश सरकार ने गेहूं पर 4 फीसदी टैक्स लगा दिया है, जिससे यहां कीमतें बढ़ रही हैं। तेल और दाल की कीमतें बढ़ने का कोई ठोस कारण सामने नहीं आया है।

बोनस का असर
: धान के लगातार रिकार्ड उत्पादन के बाद भी छत्तीसगढ़ में चावल महंगा होता जा रहा है। छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश अग्रवाल का कहना है केंद्र सरकार ने गेहूं व धान का समर्थन मूल्य बढ़ा दिया। इसका सीधा असर बाजार पर पड़ा है। किसानों को 100 रुपए बोनस अलग से दिया जा रहा है। लेवी रेट 1100 से बढ़कर 1250 रुपए कर दिया गया है। यह सारी रकम उपभोक्ता से ही वसूली जाएगी।





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