भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच दूसरे टेस्ट में अंपायरिंग को लेकर जो कुछ भी हुआ, उससे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) को सबक लेना चाहिए। खेल में अंपायर जो भूमिका निभा रहे हैं उसकी जांच होनी चाहिए। खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करें, लेकिन नतीजा कुछ और निकले तो जाहिर है कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ है।
ऐसी स्थिति में खिलाड़ियों और क्रिकेटप्रेमियों का निराश होना स्वाभाविक है। सबसे बड़ी बात यह है कि क्रिकेट जैसे महान खेल को ऐसी बातों से धक्का लगता है। क्रिकेट इसकी शुद्धता, सादगी और खिलाड़ी भावना के कारण जेंटल मैन्स गेम कहलाता रहा है, पर खराब अंपायरिंग के कारण क्रिकेट से गलत पैगाम चला गया।
आधुनिक समय में स्पर्धा बहुत बढ़ गई है। क्रिकेट में मान-सम्मान के साथ पैसा भी बहुत आ गया है। इसके कारण खेल में बहुत बदलाव आ गया है। पहले क्रिकेट मैच जहां होते थे, अंपायर भी उसी मुल्क के होते थे। खेल के पेशेवर होने के साथ न्यूट्रल अंपायर की अवधारणा आई। शुरुआत में एक अंपायर मेजबान देश का और एक न्यूट्रल अंपायर होता था। फिर दोनों अंपायर न्यूट्रल रखे जाने लगे। इसके बाद आईसीसी ने अंपायरों की एलिट पैनल बनाई। पैनल में होने का मतलब यह है कि ये खेल के सर्वश्रेष्ठ अंपायर हैं। अब वे भी गलतियां करने लगे तो यह आईसीसी के लिए आंखें खोलने वाली बात है।
यह तो नहीं कहा जा सकता कि अंपायरों ने जानबूझकर गलत फैसले दिए, लेकिन स्पर्धा के इस दौर में अक्षमता नहीं चल सकती। ऐसे फैसले कड़वाहट छोड़ जाते हैं। कोई भी संदेह हो तो अंपायर को तकनीक का सहारा लेना चाहिए। सौरव गांगुली का ही मामला लें। इसमें तकनीकी मदद लेने की गुंजाइश थी। राहुल द्रविड़ का बल्ला पैड के पीछे था, पर अंपायर स्टीव बकनर इसे देख नहीं सके। पूरे सिडनी ग्राउंड ने पैड से गेंद के टकराने की आवाज सुनी।
बहुत सारे लोग शायद मानते हैं कि स्टीव बकनर जानबूझकर भारत के खिलाफ फैसले देते हैं। हो सकता है दूसरी टीमों के मैचों में भी वे ऐसे ही फैसले देते हों। चूंकि हमारा ध्यान सिर्फ अपने मैचों पर होता है इसलिए हमें ऐसा लगता है। यह भी सही नहीं है कि सभी गलत फैसले भारत के खिलाफ दिए गए। अधिकांश फैसले भारत के खिलाफ रहे तो कुछ निर्णय ऑस्ट्रेलिया के लिए भी गलत रहे। वे 61 साल के हो चुके हैं। उन्हें कुछ समस्याएं हो सकती हैं।
आईसीसी को इतनी बड़ी सीरीज के लिए अंपायर नियुक्त करते समय इस तथ्य पर ध्यान देना था। ऑस्ट्रेलिया वल्र्ड चैंपियन है और भारत में क्रिकेट के लिए जबरदस्त पैशन है। आज भारत-पाकिस्तान सीरीज की उतनी चर्चा नहीं होती, जितनी भारत-ऑस्ट्रेलिया सीरीज की होती है।
मुझे यदि आंखों में दिक्कत है तो मैं चश्मा लगाऊंगा, कानों से दिक्कत है तो ईयर एड का उपयोग करूंगा। वैसे सीरीज के पहले अंपायरों का बकायदा मेडिकल चेक अप भी होता है। उसकी जिम्मेदारी कौन लेता है? वह कैसे होता है?
आने वाले समय में ऐसी समस्याएं बढ़ती जाएंगी। जहां तक मैच की बात है, ऑस्ट्रेलिया टीम बहुत अच्छा खेली। भारत ने बहुत अच्छा फाइट बैक किया। नतीजा तो ड्रॉ ही होना था। अनिल कुंबले ने दो घंटे बल्लेबाजी की। गांगुली अच्छा खेले। भारत के खेल में कमियां भी रहीं। एक ओवर में तीन विकेट गिरे और सारे फैसले सही थे। जाफर, युवराज, लक्ष्मण फेल रहे। कई और भी कारण थे पर मैच के फैसले के बाद खटास नहीं आना चाहिए।