bhaskar Web English
HomeNewsMadhya PradeshGwalior Gwalior

गुणवत्ता नहीं, कमीशन चाहिए

gग्वालियर. सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) के तहत ग्वालियर अंचल में निर्माण कायरें के लिए मिली एक अरब 92 करोड़ की राशि में से एक चौथाई राशि कमीशन के नाम पर अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की जेबों में जा चुकी है। बिना एक ईंट रखे पूर स्कूल भवन की राशि ही खुर्दबुर्द करने के कई मामले भी प्रकाश में आए हैं।

निर्माण कार्यो की जवाबदेही पालक शिक्षक संघ (पीटीए) से लेकर इस साल ग्राम पंचायतों व संबंधित नगरीय निकाय को सौपंी गई है। पीटीए ने निर्माण कार्यो के लिए निर्धारित नाम्र्स को बला-ए-ताक रखकर जमकर लूटखसोट मचाई। राज्य शिक्षा केंद्र की ओर से भवन निर्माण के लिए ड्राइंग-डिजायन तैयार कराकर पीटीए को इस हिदायत के साथ उपलब्ध कराए गए थे कि उसमें किसी भी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं किया जाए और यदि परिवर्तन आवश्यक हो तो इसकी अनुमति ली जाए। इसके बावजूद अधिकांश स्कूल भवनों का डिजायन ही नहीं बदला गया, बल्कि घटिया से घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग भी किया गया। गोहद ब्लाक के कतरौल गांव के स्कूल भवन का निर्माण कुछ माह पहले ही किया गया है लेकिन इस भवन की छत पर जाने से भी बच्चे व शिक्षक कतराते हैं। दीवारों में दरार पड़ चुकी हैंऔर प्लास्टर कई जगह से उखड़ गया है। इसी प्रकार नुन्हड़ गांव में अतिरिक्त कक्ष का निर्माण स्कूल भवन से लगभग एक किमी दूर किया गया, जिसका परिणाम यह हुआ कि लोग अतिरिक्त कक्ष के खिड़की-दरवाजे तक निकालकर ले गए। जिले में कई स्कूल भवनों का उपयोग ही नहीं हो रहा और बच्चे पूर्ववत खुले मैदानों में ही पढ़ रहे हैं। पहाड़गढ़ इलाके में दो दर्जन से अधिक स्कूल गुणवत्ता विहीन हैं। किसी की दीवार दरकी हुई है, तो किसी की छत लटकने की स्थिति में है।

ग्वालियर-चम्बल संभाग के लिए वर्ष 2007-08 हेतु 2832 निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए और इसके लिए 30.72 करोड़ रुपये जारी कर दिए, इसके बावजूद 31 दिसंबर 07 की स्थिति में एक भी निर्माण कार्य अंचल में शुरू नहीं हो सका। इसके अलावा वर्ष 2006-07 तक स्वीकृत निर्माण कार्यो में से जहां अब तक 2138 कार्य अधूर पड़े हैं, वहीं 8518 पूर्ण कार्यो में से 2056 का पूर्णता प्रमाण पत्र जारी नहीं किए गए हैं।

रोचक तथ्य यह कि निर्माण राशि का पूर्ण उपयोग करने के बावजूद किसी भवन की नींव भरी पड़ी है, तो किसी की दीवारें व छत अधूरी हैं। धौंधा गांव में तो भवन के नाम पर ईंट तक नहीं रखी गई और पूरा पैसा जनप्रतिनिधियों की जेब में चला गया। वैसे बिना कोई निर्माण कार्य कराए लाखों रुपये हजम करने के मामले सर्वाधिक श्योपुर जिले के हैं। लगभग आधा सैकड़ा स्कूल भवन ऐसे हैं जिनका निर्माण कागजों पर पूर्ण भी हो गया, मगर मौके पर उसका नक्शा तक नहीं खींचा गया। शिवपुरी, ग्वालियर व दतिया जिले में भी ऐसे मामले प्रकाश में आए हैं। कहीं दबंगों की राजनीति, तो कहीं जगह का अभाव भी समय से निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं होने की वजह रहा है लेकिन ऐसे मामले अंचल में कम ही हैं।

गौरतलब यह कि निर्माण कार्ये की राशि क्रमश: तीन किस्तों में जारी की जाती है। एक किस्त के पूर्ण उपयोग पर दूसरी और दोनों के उपयोग पर तीसरी किस्त प्रमाणीकरण के बाद जारी होती है। बिना उपयोगिता प्रमाण पत्र के बिना किस्त कैसे जारी की गई? यह जांच का विषय होना चाहिए। सूत्रों की मानें तो निर्माण विभागों से आए इंजीनियरों का सरोकार गुणवत्ता की बजाय कमीशन से अधिक रहता है। पूर्व आयुक्त राज्य शिक्षा केंद्र ने भी गत सत्र में निर्माण कार्यो की किस्त बिना किसी प्रमाणीकरण के शत-प्रतिशत जारी कर दी, जिसका सिस्टम से जुड़े लोगों ने स्वहित में उपयोग किया।

ऐसे जांची गुणवत्ता

राज्य शिक्षा केंद्र ने एक इंजीनियरिंग कंसल्टेंट फर्म को थर्ड पार्टी क्वालिटी कंट्रोल के लिए अधिकृत किया था लेकिन यह एजेंसी गुणवत्ता जांचने की बजाय अपने विकास में ही जुट गई। नियमानुसार इसे निर्माण कार्य राशि का तीन प्रतिशत गुणवत्ता जांच के लिए मिलना था। इसलिए एक वरिष्ठ आईएएस की शह पर बिना फील्ड वर्क के कागजी रिपोट्र्स तैयार करके प्रदेश के कई जिलों में लाखों रुपये के भुगतान के लिए आवेदन लगा दिए। कुछ डीपीसी ने जब इस फर्म के कार्यालयों को देखा, तो वे आश्चर्यचकित रह गए।

क्योंकि उक्त फर्म के पास न तो गुणवत्ता जांचने के यंत्र व कैमिकल थे और न ही कार्यालय। श्योपुर, ग्वालियर, भिंड व मुरैना में कार्यालय दड़बेनुमा कमरों में चलते पाए गए। प्रदेश के कई जिलों में इस फर्म को भुगतान भी हो गया। अंचल के कुछ जिले भी इसकी चपेट में आए।

क्यों नहीं होती कार्रवाई

नियम है कि निर्माण एजेंसी द्वारा किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता करने पर प्रदाय की गई राशि की वसूली भू-राजस्व के बकाया की भांति वसूल की जाएगी लेकिन ग्वालियर अंचल में ऐसा कोई उदाहरण प्रकाश में नहीं आया, जब संबंधित पीटीए से राशि वसूल की गई हो। हालांकि कुछ डीपीसी ने ऐसे लोगों (शिक्षक भी) के खिलाफ मामले दर्ज किए जाने संबंधी नोटिस अवश्य जारी किए हैं।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: