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सेठी अलविदा, जयपुर फुट रहेगा चिरायु

जयपुर. जयपुर फुट को पूरी दुनिया में पहचान दिलाने वाले डॉ. पी.के. सेठी का रविवार को यहां हार्ट अटैक से निधन हो गया। वे 80 वर्ष के थे। उनका अंतिम संस्कार लालकोठी के श्मशान घाट में किया गया, जहां चिकित्सा और प्रशासनिक क्षेत्र की कई हस्तियां मौजूद थीं। डॉ. सेठी को अपंगों के लिए जयपुर फुट बनाने के लिए पद्मश्री, मैग्सेसे और चिकित्सा क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया।

प्रचार-प्रसार से दूर रहने वाले डॉ सेठी ने कुछ समय पूर्व ही दैनिक भास्कर से अपने जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर खुलकर बातचीत की थी। उन्होंने बताया था किजयपुर फुट बनाने की प्रेरणा उन्हें अपने आसपास के लोगों से ही मिली। कुछ लोग विदेश जाकर फुट लगवा तो आते थे, पर भारतीय माहौल के हिसाब से वे आरामदेह नहीं थे। यह देखकर उन्हें लगा कि कुछ ऐसा होना चाहिए जो लोगों की शारीरिक मनोवृत्तियों के अनुकूल हो।

इसके बाद किए गए गहन अनुसंधान का परिणाम जयपुर फुट के रूप में सामने आया। जनरल सर्जरी छोड़कर ऑर्थोपेडिक्स के शुरुआती दौर से ही सेठी ने इस क्षेत्र में अनुसंधान कार्य करना शुरू कर दिया। कई मुश्किल हालात का सामना करते हुए उन्होंने इलाज की आसान तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए इसे विदेशों में पहुंचाया।

विदेशों में कई प्रशिक्षण केंद्र चलाने के साथ जयपुर में सवाई मानसिंह अस्पताल और उसके बाद संतोकबा दुर्लभजी मेमोरियल अस्पताल में भी कई प्रशिक्षण शिविर शुरू किए। डॉ सेठी अपनी संपूर्ण दिनचर्या को मरीजों के लिए ही समर्पित करते थे।

जन्म-
28 नवंबर 1927, वाराणसी
शिक्षा-
आगरा विश्वविद्यालय से एमडी
सहयोगी-
पत्नी सुलोचना सेठी
प्रशिक्षण-
1971 में इंग्लैंड फैलोशिप
सबसे मुश्किल समय-
शुरुआती दौर में जब इलाज करने के लिए उपकरण रखने को भी जगह नहीं मिलती थी।
अच्छा पल‍‍-
जब 1960 में जयपुर फुट बनाने की शुरुआत की
आदर्श चिकित्सक-
जिसे अपने मरीजों के साथ सहानुभूति हो।
कामयाबी पाने का मंत्र-
ईमानदारी, मेहनत और लगन
चिकित्सा का क्षेत्र-
बहुत अच्छा है, इसमें करने के लिए बहुत कुछ है।





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