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जांच चौकियों की उपयोगिता पर सवाल

भोपाल. बिट्टन मार्केट स्थित वाणिज्यिक कर विभाग के दफ्तर के आसपास का माहौल अक्सर किसी ट्रांसपोर्ट एरिया जैसा दिखता है। ट्रक जांच के नाम पर यहां लाए जाते हैं और लंबे समय तक 'कार्रवाई' चलने के बाद ही उन्हें छोड़ा जाता है। इस समूची प्रक्रिया ने विभाग की प्रदेश भर में स्थित जांच चौकियों की उपयोगिता पर सवालिया निशान लगा दिया है।

गौरतलब है कि किसी ट्रक में लदे सामान की बिल्टी, फार्म 49 सहित उसका वजन आदि के दस्तावेज की जांच के लिए प्रदेश भर में जांच चौकियां स्थापित की गई हैं। इस व्यवस्था का चौंका देने वाला पहलू राजधानी में ही नजर आ रहा है। जहां जांच चौकी से निकले ट्रक को भी वाणिज्यिक कर विभाग का अमला रोक रहा है। उनके दस्तावेज को गलत बता कर या किसी अन्य छोटी-मोटी गलती के नाम पर ट्रक विभाग के कार्यालय पर ले जाया जाता है। जबकि इस जांच के घेरे में आने वाले ट्रकों को जांच चौकी पहले ही ओके बता चुकी होती है। इस प्रक्रिया से गुजर चुके ट्रक चालक बताते हैं कि इस सारी कवायद का अंत एक मोटी रकम देने से ही होता है। चालकों की मजबूरी यह है कि कई बार उनके ट्रक में जल्दी नष्ट होने वाले पदार्थ लदे रहते हैं। ऐसे में माल खराब होने की आशंका के चलते वे विभाग के अमले को पैसा देकर निकल जाना ही बेहतर समझते हैं।

माल भेजने से हिचकने लगे

अखिल भारतीय व्यापारी महासभा के प्रवक्ता अनुपम अग्रवाल का दावा है कि इस अनावश्यक परेशानी को देखते हुए शहर से बाहर के कई ट्रांसपोर्टर यहां माल भेजने से हिचकने लगे हैं। जिससे ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर बुरा असर पड़ सकता है। अशोक ट्रांसपोर्ट के संचालक गोपेंद्र मालपानी कहते हैं कि दीगर राज्यों से आने वाले ट्रक बेवजह जांच के नाम पर रोक लिए जाते हैं।

कैंसिल हो जाते हैं आर्डर

भोपाल लोहा व्यापार एवं निर्माण संघ के अध्यक्ष अब्दुल अजीज बताते हैं कि प्रदेश के ही शहरों से भोपाल आने वाले लोहे को भी जबरिया रोका जाता है, जबकि इनमें फार्म 49 का प्रावधान लागू नहीं है। लंबे समय तक ट्रक खड़ा रहने से समय पर सप्लाई नहीं हो पाती और ग्राहक आर्डर कैंसिल कर देता है। इससे कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ता है।

जांच चौकियों से माल के वाउचर पर मुहर लगाना अनिवार्य है, नहीं होने पर संदेह के आधार पर ट्रक रोका जा सकता है। लेकिन चौकी प्रभारी मुहर नहीं लगाता, तो शिकायत मिलने पर उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
बाबूलाल गौर, वाणिज्यकर मंत्री

मप्र में आने वाले सामान की जांच के लिए प्रदेश की सीमाओं पर विभागीय चौकियां बनाई गई हैं। प्रदेश के शहरों से आने वाले सामान पर फार्म 49 की छूट है, लेकिन जांच होगी। दस्तावेज होने पर भी ट्रकों को रोकना गलत है।
- एके नायक, उपायुक्त वाणिज्यकर विभाग





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