अजमेर.
अजयमेरू केनेल क्लब और 94.3 माय एफएम की ओर से रविवार को आजाद पार्क में आयोजित ‘फस्र्ट ऑल ब्रीड ओपन डॉग शो’ शहरवासियों के लिए यादगार रहा। विभिन्न परिधानों में सजे डॉग्स द्वारा रैंप पर किया गया कैटवॉक शो का मुख्य आकषर्ण रहा। रिजर्व पुलिस फोर्स और मास्टर ट्रेनरों के डॉग्स के करतबों को देख श्वान प्रेमी रोमांचित हो गए।
दोपहर में हुए फैशन शो में सबसे पहले डॉग ‘टोटो’ ने मैदान में प्रवेश किया। आंखों पर चश्मा लगाए और विशेष परिधान में सजे टोटो को देखते ही दर्शकों ने करतल ध्वनि से उसका उत्साहवर्धन किया। परी की तरह सफेद चमकीली ड्रेस में सजी और तारा लगाए आई लूसी और उसके बाद आई छुटकी की वेशभूषा देख कर भी दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। स्पोर्ट्समैन बन कर आए पग नस्ल के डॉग ‘नॉटी’ ने अपनी शरारतों से दर्शकों का दिल जीत लिया। सांता क्लॉज की ड्रेस पहन कर आए ताशा ने भी अपनी अदाओं से दर्शकों का दिल जीत लिया। इधर स्कर्ट और चोली पहन कर आई डोना ने भी अपने जलवे दिखाए। हाफ पेंट और टीशर्ट पहने और चश्मा लगाए पहुंचे सेम की अदाओं के भी दर्शक कायल हो गए।
जज के रूप में आई कलेक्टर नवीन महाजन की पत्नी ने रिया गहलोत के डॉग ‘नॉटी को प्रथम घोषित किया। इसके अलावा अरिंजय सिंह के डॉग मिनी को द्वितीय और नितिन के डॉग ताशा को तीसरा पुरस्कार मिला।
सेल्यूट मारा, रिंग से उछले
इससे पूर्व विभिन्न प्रशिक्षित डॉग्स ने अपने करतबों से दर्शकों को रोमांचित कर दिया। लेब्राडोर नस्ल के डॉग ने ट्रेनर राकेश शर्मा के इशारे पर रिंग से कूद कर दर्शकों की वाहवाही बटोरी। इसके बाद छिपाकर रखे रुमाल को ढूंढ कर लाने, सिक्का ढूंढ कर लाने के करतब दिखाए। आरपीएफ के डॉग ने सेल्यूट मारने और गुम चीजों को ढूंढ कर लाने के करतब दिखाए।
पग ब्रीड के रॉक्सी ने दो पैरों पर सीधे खड़े होकर हैंड शेक करने, पीछे चलने और किस करने के करतब दिखाए। जर्मन शेफर्ड ब्रीड के ‘रोजर’ और आदित्य दिव्या सिंह के ब्लैक कलर के लेब्राडोर ने भी अपने करतब पेश किए।
बड़े शहरों से भी आए डॉग्स
शो में जिले के विभिन्न क्षेत्रों समेत दिल्ली, जयपुर, जोधपुर और उदयपुर से 245 श्वान पहुंचे।
दर्शकों का तांता
शो में जर्मन शेफर्ड, पग, पामोरियन, लेब्राडोर, स्पिट्ज, ल्हासा एपसो, कोकर स्पेनील, आयरिश सेटर, पॉइंटर, फॉक्स टेरीबियर, साइबेरियन हस्की, बॉक्सर, डॉबरमेन, डलमातियन, नेपोलियन मास्टीफ, बुल, रोट वीलियर, जीएसडी, सेंट बर्नार्ड और गेट्र डेन 25 ब्रीड के डॉग लाए गए। इन्हें देखने के लिए श्वान प्रेमियों की भीड़ लगी रही।
शो का उदघाटन कलेक्टर नवीन महाजन ने किया। पुरस्कार वितरण समारोह के मुख्य अतिथि मुद्रांक एवं पंजीयन विभाग के एडीशनल आईजी हनुमानसिंह भाटी की पत्नी थीं। अजयमेरू केनेल क्लब के अध्यक्ष डॉ. वीके मिश्रा ने अतिथियों का स्वागत किया।
चैंपियन ऑफ द शो ‘पग’
जयपुर के राजेंद्र चौधरी के पग को चैंपियन घोषित किया गया। बेस्ट पपी का खिताब भी गेटड्रेन को मिला। जर्मन शेफर्ड ब्रीड में टफी, बाल्टो व बास्को क्रमश: प्रथम, द्वितीय व तृतीय रहे। बेस्ट हैंडलर एसएन जोशी को व बेस्ट चाइल्ड हैंडलर का इनाम उत्कर्ष व साहिल को दिया गया।
कद्रदानों का कमाल
वफादारी उनकी सबसे बड़ी पहचान है। वे प्यार से मिलने वालों के दोस्त हो जाते हैं और उनकी जद में आना, दुश्मन के लिए सबसे बुरा वक्त होता है। बात हो रही है श्वानों की निराली दुनिया की। लेकिन उन्हें पालना कोई हंसी-खेल नहीं है। रविवार को आजाद पार्क पहुंचे पालकों से ‘भास्कर’ ने जाना उनका तजुर्बा।
बेस्ट प्रोटेक्टर
मयूर स्कूल की वाइस प्रिंसिपल कृष्णा भाटी कहती हैं, डॉग इंसान को गुड लीडर बनने के गुण सिखाते हैं। अच्छी चीजों को चुनना और सही वक्त पर ही गुस्सा करना, उनकी आदत में शुमार होता है। उन्होंने बताया कि 4 साल पहले उन्होंने देहली पुलिस से लेब्रॉडोर ब्रीड का लियो खरीदा था। लियो की ड्यूटी हर साल इंडिया गेट पर लगती थी।
बम और दूसरी संदिग्ध वस्तुओं को खोजने में यह मदद करता था। उन्होंने कहा कि पति फौज में है, वे लंबे समय तक घर से दूर रहते हैं, ऐसे में लियो सबसे बड़ा प्रोटेक्टर है। पीछे से बच्चों की भी गार्जियन की तरह हिफाजत करता है।
मेहनत के दम पर..
मेजर पुनीत चौहान के पास पग ब्रीड का बबल है। उन्होंने बताया कि डॉग से इंसान सकारात्मक सोच सीख सकता है। कठिन से कठिन करतब भी डॉग अपनी मेहनत के बल पर सीख जाते हैं। छुपाई हुई वस्तुओं को ढूंढ लाते हैं। इंसान मेहनत करे तो कुछ भी असंभव नहीं है। जरूरत है अनुशासन, समय की पालना और फरमांबरदारी की।
सजाने पर खास जोर
नीलम शर्मा को डॉग्स पालने का शौक 25 साल से है। ब्रूनो को सजाने पर खास जोर रहता है। उन्होंने बताया कि ब्रूनो के बाल वैसे तो कुदरती तौर पर चमकीले हैं, लेकिन फिर भी सप्ताह में एक बार शेंपू से जरूर धोती हैं। हरेक से अटेचमेंट के कारण ही ब्रूनो सब को बहुत प्यारा लगता है।
इतना घुल मिल गया..
लेफ्टिनेंट कर्नल संजय नागपाल के पास तीन साल से ‘सिल्वर’ लेब्रॉडोर है। काफी फरमांबरदार है। नागपाल ने बताया, घर में ही वाइफ ने इसे ट्रेनिंग दी। इसे पुणो से खरीदा था। सिल्वर परिवार के सदस्यों से इतना घुल मिल गया है कि अब कोई इससे अलग नहीं रह सकता।
परिवार का हिस्सा
अमनदीपसिंह जर्मन शेफर्ड ‘रॉकी’ के साथ शो में पहुंचे। सिंह ने बताया कि रॉकी दस महीने का है। शौक के हिसाब से इसे लाए थे, लेकिन अब यह परिवार का हिस्सा बन चुका है। पापा के गेट खोलते ही उनसे लिपट जाता है। उन्होंने बताया कि रॉकी सबसे ज्यादा कहना उनकी मम्मी का मानता है, क्योंकि वही उसकी देखभाल करती हैं।