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मां ने कराई बेटी की हत्या

जोधपुर. murder सूरसागर क्षेत्र में युवती की हत्या के आरोप में पुलिस ने रविवार को उसकी मां, मामा और मामा के दोस्त को गिरफ्तार किया। युवती ललिता की शनिवार अलसुबह रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पुलिस के अनुसार युवती अपने पति को छोड़कर दूसरी जाति के शादीशुदा युवक से विवाह करने की जिद कर रही थी, जिससे पूरा परिवार उसके विरुद्ध खड़ा हो गया।

बेटी ही हत्या के लिए मां ने अपने भाई को राजी किया और भाई ने अपने दोस्त के साथ मिलकर भानजी को मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने मां, मामा और उसके दोस्त को गिरफ्तार कर लिया है। सूरसागर थाना क्षेत्र के भानाला बेरा रामसागर गोलासनी में शनिवार अलसुबह हुई ललिता माली की हत्या का राज खुल गया है।

सिटी एसपी हवासिंह घुमरिया ने रविवार को पत्रकारों को बताया कि डीएसपी धर्म्ेद्रसिंह सागर, थानाधिकारी बनवारीलाल धायल और ओमप्रकाश गौतम की टीम ने हत्याकांड का 17 घंटे में पर्दाफाश कर ललिता की मां तारादेवी, मामा मोहनलाल और उसके दोस्त अजरुन टाक को गिरफ्तार कर लिया। तीनों आरोपियों ने जुर्म स्वीकार करते हुए बताया कि वे लोग ललिता के मांगीलाल मेघवाल से अवैध संबंध और उससे शादी करने की इच्छा से खफा थे।

शनिवार तड़के मोहनलाल ने नींद में सो रही ललिता का मुंह अपनी टोपी से बंद किया और फिर अजरुन ने खुखरी से उस पर तीन वार किए। बाद में मोहन ने भी एक गहरा वार उसके पेट पर किया। सुबह आठ बजे ललिता का भाई मुकेश उठा, तब उसने ललिता को खून से लथपथ पाया। उसी ने हत्या के बारे में पड़ोसियों को बताया और फिर पुलिस को सूचना दी।

गुमराह हुई थी पुलिस
तारादेवी ने हत्या की योजना अपने भाई मोहनलाल के साथ मिलकर दो-तीन दिन पहले ही बनाई थी। हालांकि पुलिस वारदात के वक्त गुमराह हो गई थी। मृतका का तीन वर्षीय पुत्र किसी बाबा का नाम बता रहा था। मां तारादेवी ने भी मृतका के पति भीखसिंह उर्फ टीकमराम पर संदेह व्यक्त किया। पुलिस ने भीखसिंह से पूछताछ की तो उसने अनभिज्ञता जाहिर की। बाद में मालूम चला कि तीन वर्षीय बालक घटना के समय दूसरे कमरे में सो रहा था।

मांगीलाल से थे अवैध संबंध
पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया तो शव के पास एक मोबाइल फोन मिला। हैंडसेट में मांगीलाल मेघवाल के नंबर थे और उसी के रिसीव कॉल थे। पुलिस ने इस पर मांगीलाल के बारे में पता किया तो जानकारी मिली कि मृतका का पति मांगीलाल के पास काम करता था।

वेतन लेने ललिता ही जाती थी, इसलिए उसकी मांगीलाल से जान-पहचान हो गई। ललिता चार सालों से पति अलग रह रही थी। इस दौरान उसके मांगीलाल से अवैध संबंध बन गए। वह शादीशुदा मांगीलाल से दूसरा विवाह करना चाहती थी। यही बात ललिता के परिजनों को नागवार लगी।

खुखरी बरामद करने के प्रयास
मृतका की मां तारादेवी को रोते देख मामा मोहनलाल ने ललिता की हत्या करने की ठानी। वह अश्विनी के घर से खुखरी लेकर आया और अजरुन टाक को हत्या करने के लिए राजी कर लिया। अजरुन बीए प्रथम वर्ष का विद्यार्थी है। मांगीलाल ने सुबह तारादेवी को फोन किया तो तारादेवी ने लाइट जला-बुझा कर इशारा कर दिया।

तारादेवी ने मोहन व अजरुन को घर में भेज कर बाहर से गेट बंद कर दिया और स्वयं सब्जी लेने मंडी चली गई। हत्या के बाद मोहन ने अपनी बहन को बता दिया कि काम हो गया है। तारादेवी घर लौटी और बेटी की मौत पर दहाड़े मार कर रोने लगी। उसकी यह चाल कामयाब नहीं हुई और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस वारदात में प्रयुक्त खुखरी बरामद करने का प्रयास कर रही है।

हत्या के सबूत मृतका के नाखून में
ललिता की हत्या का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है। उसका मासूम बेटा भी बगल वाले कमरे में मामा के साथ सो रहा था। पुलिस के अनुसार पलंग पर हुए संघर्ष के दौरान ललिता के नाखूनों से मोहन व अजरुन के शरीर पर खरोचें आ गई थीं। पुलिस ने ललिता के नाखूनों में लगी चमड़ी को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा है।





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