उदयपुर. पंजाब से प्रतिदिन उदयपुर होकर एक करोड़ से अधिक की शराब गुजरात तस्करी की जा रही है। शराब तस्करी का दायरा लगातार बढ़ने के बावजूद पुलिस अब तक उन तस्करों तक नहीं पहुंच पाई है जो ट्रक ड्राइवर का इस्तेमाल कर पर्दे के पीछे रहते हैं। अधिकांश मामलों में पंजाब के एक तस्कर का नाम आया है, लेकिन उस तक भी पुलिस नहीं पहुंच पाई है।
सूत्रों के अनुसार उदयपुर, खेरवाड़ा व डूंगरपुर के लोकल तस्कर पंजाब से गुजरात शराब भेजने का काम करते हैं। ड्राइवर व खलासी के पकड़े जाने पर पंजाब के एक नामी तस्कर का नाम लेते हैं जो शराब तस्करी के नाम पर कुख्यात है। पुलिस जब इस मामले की तह तक जाने की कोशिश करती है, तो ट्रक नंबर, बिल्टी, ट्रक के रजिस्ट्रेशन नंबर सभी फर्जी पाए जाते हैं और जांच फिर तस्कर के नाम तक ही आकर खत्म हो जाती है।
पिछले दो वर्र्षो में गोवर्धनविलास, हिरणमगरी व प्रतापनगर पुलिस ने करोड़ों रुपए की गुजरात जा रही अवैध शराब की ट्रकों को पकड़ा है, लेकिन इनमें ज्यादातर मामलों में जांच में पुलिस को कुछ विशेष हाथ नहीं लगा। पुलिस की जांच पूरी होने से पहले ही गिरफ्तार ट्रक-खलासियों की जमानत हो जाती है। बाद में वे फिर से पुलिस के हाथ नहीं आते।
सांझापुर बॉर्डर से राज्य में आती है शराब
सांझापुर बोर्डर से चंडीगढ़ व पंजाब के अन्य क्षेत्रों से अवैध शराब राजस्थान में आती है, जो चित्तौड़ या फिर भीम-ब्यावर होकर उदयपुर पहुंचती है। उदयपुर में गोवर्धनविलास थाना क्षेत्र या प्रतापनगर-बलीचा हाइवे से खेरवाड़ा होकर गुजरात पहुंचती है।
खेरवाड़ा व डूंगरपुर में हैं तस्करों के गोदाम
खेरवाड़ा व डूंगरपुर क्षेत्र में उदयपुर व आसपास के तस्करों ने गोदाम बना रखे हैं, जो शराब की ट्रकें वहां खाली करवा देते हैं। इसके बाद गुजरात के तस्करों के जरिये गुजरात नंबर के छोटे चार पहिया वाहनों के माध्यम से शराब गुजरात के राजकोट तक पहुंचती है। वहां भी गुजरात के तस्करों के गोदाम बने हैं जहां से शराब स्थानीय तस्करों को बेची जाती है।
डिप्टी योगेश गोयल के जवाब
जेपी चड्ढा कौन है?
बताया जाता है कि यह पंजाब का बड़ा शराब ठेकेदार है, लेकिन आज तक उसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। चड्ढा शराब बेचता है। इसमें लोकल तस्कर की भी मिलीभगत है।
ड्राइवर-खलासी से क्या पता चल पाया है?
ड्राइवर-खलासी से मोबाइल मिलते हैं, जिससे उनको शराब को गंतव्य तक पहुंचाने के बारे में दिशा-निर्देश दिए जाते हैं। ड्राइवर-खलासी को यह पता नहीं होता है कि शराब कहां से भरी गई है और कहां पहुंचानी है। उन्हें सारे निर्देश तत्काल दिए जाते हैं। मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवाने पर जो नंबर सामने आते हैं, वे भी फर्जी होते हैं।
ट्रक के कागजात से कुछ पता चल पाया?
शराब तस्करी में काम में ली जाने वाली ट्रकों में दो-तीन नंबर प्लेट होती है। ट्रकों पर फर्जी नंबर लगाए जाते हैं, जिससे ट्रक मालिकों का पता नहीं चल पाता है।
बिल्टी, रजिस्ट्रेशन नंबर भी फर्जी होते हैं?
पर्दे के पीछे कौन हैं?
यह बड़ा कारोबार है। प्रतिदिन करीब आठ-दस ट्रक शराब गुजरात जाती है। पुलिस को जितनी जानकारी मिलती है, उतनी कार्रवाई की जाती है। यह कारोबार होता तो ड्राइवर व खलासी के दम पर, लेकिन इसमें बड़े शराब ठेकेदार भी शामिल होते हैं।