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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. नगरीय प्रशासन विभाग को उम्मीद है कि मशीनों का इस्तेमाल शुरू होते ही राजधानी सहित राज्य के सभी 10 नगर निगम वाले शहरों में सड़कें सुबह से चकाचक हो जाएंगी। इलेक्ट्रानिक स्वीपिंग मशीनों से ऐसा संभव होगा। 6 करोड़ की ऐसी मशीनें खरीदी जाएंगी।
सफाई अमले की कमी से जूझ रहे नगर निगमों के लिए इसे बेहतर विकल्प माना जा रहा है। अफसरों के मुताबिक एक मशीन 100 सफाई कर्मियों का काम करेगी। इसे आपरेटर करने और सपोर्ट के लिए एक-एक कर्मचारी की जरूरत होगी। एक मशीन की क्षमता 5 हजार लीटर होगी। अधिकारियों का दावा है कि शासन जिन मशीनों को खरीदने जा रहा है, वह सर्वाधिक क्षमता वाली हैं।
मशीन का डिमांस्ट्रेशन देखने बिलासपुर के महापौर अशोक पिंगले और जगदलपुर की महापौर गीतेश मल्ल के साथ नगरीय प्रशासन और सीएसआईडीसी के अफसरों का दल बेंगलूर गया में है। मशीनें टीपीएसएमएफजी एजेंसी से खरीदी जा रही हैं। हर मशीन की कीमत 60 लाख रुपए है। अधिकारियों का मानना है कि मशीनों ने मुख्य मार्गो की सफाई संभाल ली, तो वहां लगा अमला भीतरी हिस्से की बेहतर सफाई कर सकेगा। इससे मोहल्लों में रहनेवालों की शिकायतें दूर होंगी। एक सर्वे में रायपुर को देश को सर्वाधिक धूल प्रदूषण वाला शहर माना गया गया है। रायपुर ही नहीं, राज्य के सभी प्रमुख शहरों के मुख्य मार्गो पर जबर्दस्त धूल है।
सर्दियों के मौसम में परेशानी ज्यादा है। अफसरों का मानना है कि इलेक्ट्रानिक मशीनों से रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, जगदलपुर, चिरमिरी, अंबिकापुर, कोरबा, रायगढ़, बिलासपुर, कांकेर के लोगों को बड़ी राहत मिल सकेगी। उल्लेखनीय है कि स्वीपिंग मशीनों से दिल्ली, अहमदाबाद, हैदराबाद, बैंगलूर, अंगुल आदि शहरों में अच्छे परिणाम मिले हैं। इसके अलावा कई बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां इसका इस्तेमाल कर रही हैं।
प्रत्येक निगम को एक-एक मशीन दी जा रही है। रायपुर को पहले चरण में एक तथा बाद में दो और मशीनें दी जाएंगी,क्योंकि यहां जरूरत ज्यादा है।
—सीके खेतान,सचिव, नगरीय प्रशासन