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सौर ऊर्जा से अंधेरे में जगमगाएंगे स्टेशन

भोपाल. अब रेलवे स्टेशनों पर बिजली न होने की सूरत में भी रोशनी रहेगी। यहां विकल्प के तौर पर सौर ऊर्जा के जरिए रोशनी का इंतजाम किया जाएगा। इस योजना में मप्र के 20 स्टेशनों को भी शामिल किया गया है। इसके लिए स्टेशनों पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। जो सूरज की रोशनी से चार्ज होंगे।प्रयोग के तौर पर जबलपुर के समीप हिनौता रामबन स्टेशन पर इसका इस्तेमाल कर सौर ऊर्जा के जरिए सिग्नल संचालन के साथ ही स्टेशन पर रोशनी भी की गई। जानकारी के अनुसार देश में 7090 रेलवे स्टेशन में से 5000 से ज्यादा ऐसे स्टेशन है, जहां बिजली की किल्लत रहती है। कई जगहों पर तो रोजाना 18 से 20 घंटे तक बिजली नहीं रहती।

20 स्टेशन चयनित:
रेलवे ने इस काम के लिए मप्र के 20 स्टेशन चुने हैं, प्रारंभिक तौर पर जबलपुर एवं भोपाल रेल मंडल के रोड साइड छोटे स्टेशन शामिल हैं। जहां सौर ऊर्जा पैनल लगाने का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा जा चुका है। एक पैनल की कीमत 25 लाख रुपया आंकी गई है। इस खर्च के बावजूद रेलवे इस प्रयोग से लाभ में रहेगा। क्योंकि अब तक किसी स्टेशन पर बिजली न होने की सूरत में वह डीजल का उपयोग करता है। इसमें रेलवे को हर साल करीब डेढ़ अरब रुपए की राशि खर्च करनी पड़ती है। आलम यह कि बिजली की समस्या से निपटने के लिए हर स्टेशन पर प्रति वर्ष के लिए साढ़े तीन हजार लीटर डीजल का कोटा फिक्स किया गया है।

प्रदूषण से बचाव भी:
सौर पैनल से चार्ज हुई बैटरी से किसी स्टेशन पर 12 घंटे तक बिजली का काम लिया जा सकेगा। फिलहाल जहां डीजल के इस्तेमाल से भारी मात्रा में उत्सर्जित कार्बन डाइ आक्साइड से प्रदूषण होता है, वहीं सौर ऊर्जा की बिजली से ऐसा नहीं होगा।

कैसे होगा काम:
सोलर पैनल सूर्य की रोशनी से चार्ज होंगे। इसे वोल्टेज में परिवर्तित किया जाएगा, जो बैटरी में लगे सेल्स में इकट्ठे हो जाएंगे और बिजली के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किए जा सकेंगे।





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