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भोपाल.
भोपाल सहित प्रदेश के विभिन्न संभागों (इंदौर, ग्वालियर, रीवा, जबलपुर और सागर) से आए युवाओं ने पहले दिन संगीत की विभिन्न विधाओं में अपने हुनर का प्रदर्शन किया, वहीं नाटकों और वकृत्वकला में भी अपना कौशल दिखाया। उत्सव एक साथ तीन स्थानों-रवीन्द्र भवन, मुल्ला रमूजी संस्कृति भवन और गांधी भवन में शुरू हुआ। पहले दिन रवीन्द्र भवन में लोकगीत और शास्त्रीय नृत्यों (कथक, भरतनाट्यम, ओडिसी, कुचीपुड़ी और मणिपुरी) का प्रदर्शन हुआ। इसी के साथ शास्त्रीय वाद्ययंत्रों की प्रतियोगिता भी हुई।
गांधी भवन में तो सुबह से ही नाटकों का सिलसिला चला। युवाओं ने समाज में पसरी विभिन्न कुरीतियों पर अपने नाटकों के जरिए प्रहार किए, भटकते युवाओं को सचेत करने का काम किया, तो देशभक्ति से परिपूर्ण नाटक भी खेले। ये थे- 'हिंदुस्तान जिंदाबाद', 'सम्मोहन', 'सांझे बिसरे', 'ना मारो रे', 'दंगे जब भी होते हैं', 'फांस'। शाम को यहां युवाओं के लिए हारमोनियम वादन प्रतियोगिता भी हुई।
संस्कृति भवन में हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन और कर्नाटक शैली में गायन की स्पर्धा का आयोजन था। हिंदुस्तानी पद्धति में तो 6 प्रतिभागी शामिल हुए, कर्नाटक में कोई नहीं। इसी तरह यहां आयोजित सितार वादन में इंदौर और उज्जैन के प्रतिभागी शामिल हुए, वीणा वादन के लिए कोई नहीं था। यहां युवाओं की वकृत्वकला को भी परखा गया। दो मिनट पहले दिए गए विषय पर उन्हें चार मिनट तक अपने विचार रखने थे।
खेल एवं युवक कल्याण विभाग के इस आयोजन की खासियत यह है, कि इसमें हिस्सा लेने के लिए केवल उम्र का बंधन होता है, किसी महाविद्यालय से संबद्ध होना कतई जरूरी नहीं। यूथ को-ऑर्डिनेटर अंजू नारोलिया, जिन्हें समाजसेवा के लिए राष्ट्रपति से यूथ अवार्ड भी मिल चुका है, कहती हैं, बिना किसी भेदभाव 15 से 35 की उम्र वाले युवाओं को हुनर का प्रदर्शन करने के लिए विभाग द्वारा स्वतंत्र मंच उपलब्ध कराया जाता है। इन प्रतियोगिताओं से जीते हुए युवाओं को 12 से 17 जनवरी तक चेन्नई में होने वाले 'युवा उत्सव' में हिस्सा लेने का मौका मिलेगा।
आज कहां क्या
रवीन्द्र भवन
गिटार वादन
सुबह 10 से 11.30 बजे तक
बांसुरी वादन
सुबह 11.30 बजे से दोपहर 1.00 बजे तक
गांधी भवन
सुबह 10.30 से दोपहर 1.00 बजे तक लोकनृत्य
समापन
शाम 6.00 बजे रवीन्द्र भवन में