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मछली व्यवसाय को बढ़ावा देने का प्रयास

बिलासपुर.fish छत्तीसगढ़ मत्स्य उद्योग द्वारा पिछले कुछ सालों से प्रदेश में रंगीन या अलंकारिक मछलियों के पालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसमें विभाग द्वारा निजी क्षेत्रों को सहभागी बनने भी कहा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इस साल मत्स्य विभाग ने ऐसे किसानों या निजी क्षेत्र के लोगों को जो रंगीन मछली पालने व उनका व्यवसाय करने के शौकीन हैं, उन्हें भुवनेश्वर भेजने का निर्णय लिया है।

वहां उन्हें रंगीन मछली पालन को लेकर प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि उनकी यात्रा व आवास-भोजन का खर्च विभाग द्वारा वहन किया जाएगा। इससे पहले रंगीन मछली पालने के इच्छुक लोगों को ये प्रमाणित करना होगा कि वे इस व्यवसाय के प्रति गंभीर हैं। रायपुर में रिसर्च सेंटर होने के कारण वहां रंगीन मछलियों का पालन किया जा रहा है। वहां निजी क्षेत्र के लोग भी रंगीन मछलियां पालकर बेहतर ढंग से व्यवसाय कर रहे हैं। वे भी भुवनेश्वर जाकर प्रशिक्षण ले चुके हैं।

रंगीन मछलियों के व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए विभाग तत्पर है। प्रदेश सहित जिले में मीठे जल के साधन अधिक होने के कारण इस व्यवसाय की बेहतर संभावना है। इसे व्यवसाय के रूप में अपनाने वाले को अनुदान दिए जाने पर भी विचार किया जा रहा है।
—वीपी त्रिपाठी, उप संचालक, मत्स्य विभाग बिलासपुर

भुवनेश्वर में प्रशिक्षण क्यों?

भारत में कोलकाता, चेन्नई, मुंबई रंगीन मछलियों की दृष्टि से मुख्य प्रजनक व व्यापारिक केंद्र हैं। इसके साथ ही देश में 150 नियमित व 1500 अल्पकालिक प्रजनक केंद्र हैं। उड़ीसा के भुवनेश्वर में नियमित मत्स्य प्रजनक केंद्र हैं। छत्तीसगढ़ से पास होने के अलावा यहां प्रशिक्षण की अच्छी व्यवस्था है।

क्या है एक्वेरियम व्यवसाय?

मनुष्य अपनी आवश्यकताओं के कारण प्राकृतिक वातावरण को कमतर करता जा रहा है, जबकि अपनी पहुंच के अंदर प्राकृतिक वास निर्माण करने का प्रयास कर रहा है। इस दिशा में एक्वेरियम एक अच्छा साधन है। एक्वेरियम व्यवसाय एक विकासशील व्यवसाय है, जिसकी शुरुआत 1861 में हुई थी। भारत से पैराडाइज मछली फ्रांस ले जाकर इसकी शुरुआत की गई थी, बाद में ये व्यवसाय इंग्लैंड पहुंचा।

क्यों पालें रंगीन मछलियां?

अलंकारिक मछलियां पालन हर उम्र के लोगों को आकृष्ट करता है। इससे मन प्रसन्न रहता है।
एक्वेरियम घर की शोभा तो बढ़ाता ही है, तैरती हुई रंगीन मछलियों को देखने से एक संवाद-सा कायम होता है।
एक्वेरियम हमारे मन में प्रकृति के प्रति प्रेम एवं जीव जंतुओं से लगाव की भावना उत्पन्न करता है। बच्चों के खेलने व जिज्ञासा बढ़ाने का अच्छा साधन है।
अलंकारिक मछलियों के भोजन, रखरखाव पर अन्य पालतू जीवों से कम खर्च करना पड़ता है। साथ ही साफ-सफाई आसान है।
कई पालतू जानवर पालने पर पड़ोसियों को आपत्ति होती है, लेकिन एक्वेरियम आंतरिक वस्तु होने से निजता रहती है।
अलंकारिक मछली उत्पादन करके कुटीर उद्योग के रूप में स्वरोजगार स्थापित कर सकते हैं।
मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक एक्वेरियम से तनाव कम होता है। तनाव लेकर घर लौटने वाले लोग मछलियों को तैरते देखकर तनावमुक्त हो जाते हैं।





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