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अजमेर. मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का चार सदस्यीय दल राजस्थान बोर्ड की कार्यप्रणाली से काफी प्रभावित है। दल का मानना है कि यहां चल रहे नैतिक शिक्षा और अच्छे शैक्षिक माहौल से एमपी बोर्ड ने बहुत कुछ सीखा है। सोमवार को ‘भास्कर’ से बातचीत के दौरान दल के सदस्यों ने कहा कि राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में एक छत के नीचे सिलेबस, किताबों का कंटेट और परीक्षा कार्यक्रम तय करने की प्रक्रिया अनुकरणीय है।
नतीजे बेहतर
मप्र बोर्ड के मेंबर मोहन नागा ने बताया कि उनके यहां परीक्षा परिणाम पिछले 3 सालों में बेहतर हुआ है। बारहवीं में इस बार 77 प्रतिशत बच्चे पास हुए हां, दसवीं में जरूरी इसका प्रतिशत 48 रहा लेकिन यह पिछली साल के मुकाबले 3 प्रतिशत ज्यादा है।
हरियाणा बोर्ड की सेमेस्टर प्रणाली पसंद
सदस्यों ने कहा कि मध्यप्रदेश की स्कूलों में दो साल के भीतर हरियाणा की तर्ज पर सेमेस्टर सिस्टम से परीक्षाएं होंगी। इससे विद्यार्थियों पर पढ़ाई का ज्यादा बोझ भी नहीं पड़ता और वह लगातार इसके प्रति गंभीर बना रहता है। दल के डॉ. युवराज रंगराल के मुताबिक उनके प्रदेश में कोर्स को बेहतर बनाने के लिए व्यापक सुधार किए जा रहे हैं।
इसी के मद्देनजर देश के विभिन्न राज्यों में दल भेजे गए हैं। ये दल वहां की शिक्षा और शिक्षण शैली का अध्ययन कर रहे हैं। इसके बाद बेहतर बातों को राज्य में लागू करने के लिए रिकमंड किया जाएगा।
राजस्थान में मुमकिन नहीं
जहां मध्यप्रदेश बोर्ड के सदस्य वहां सेमेस्टर प्रणाली अपनाने को आतुर थे वहीं राजस्थान बोर्ड के अधिकारियों ने इसे राज्य में लागू करने में व्यवहारिक दिक्कतों की दलील दी। परीक्षा निदेशक रामबाबू गुप्ता का कहना था राज्य में हर साल 14 लाख विद्यार्थी परीक्षा में बैठते हैं ऐसे में एक साल में दो बार परीक्षा कराना मुमकिन नहीं है।