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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़.
प्रकृति को करीब से महसूस करना, पहाड़ों पर चढ़ना, पथरीले रास्तों से गुजरना। शहर की एडवेंचरस लेडीज के ये शौक काफी उत्साहित करने वाले हैं। एडवेंचरस लेडीज का उत्साह कैट (चंडीगढ़ एडवेंचर ट्रैक स्पोर्ट) में 50 फीसदी लेडीज की भागीदारी से झलकता है।
करीब 100 मेंबर्स का कैट ग्रुप चंडीगढ़ के आसपास के कई इलाकों में ट्रेकिंग कर चुका है। इन मेंबर्स ने 10,000 फीट पर स्थित शाली पीक पर नए साल की शुरुआत की है। ट्रैकर्स क्लब की फाउंडर सुप्रीत ने बताया कि चंडीगढ़ ट्रैकर्स क्लब में उनको देखकर काफी लेडीज मेंबर बन गई हैं। 50 फीसदी लेडीज में बिजनेस वूमेन, प्रोफेशनल्स और हाउसवाइव्स शामिल हैं।
नेपली फॉरेस्ट, जाबली, कसौली, दत्यार, ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क और धतनाल जैसी जगहों पर पिछले दो महीनों में ये लेडीज ट्रैकिंग कर चुकी हैं। क्लब की लेडीज मेंबर्स से बात कर पता चला की सभी को ट्रेकिंग बहुत पसंद है।
चंडीगढ़ से पहले ट्रैकर्स क्लब की शुरुआत करने वाली सुप्रीत धीमान एक बिजनेस वूमन हैं। इनका शौक विश्व की खास जगहों पर एडवेंचरस एक्टीविटीज और ट्रैकिंग करना है। वेल्स और इंग्लैंड की हाईएस्ट माउंटेन पीक पर नाम दर्ज करवा चुकी सुप्रीत धीमान स्नोडोनिया पहाड़ी (समुद्र तल से ३६क्क् फीट ऊंचाई पर) और इंग्लैंड के स्काफल पीक (समुद्र तल से ३२क्क् फीट ऊंचाई) पर पहुंचने वाली चंडीगढ़ की पहली महिला हैं।
तीन दिन अलगाव में सुप्रीत ने पुर्तगालियों की तरह बिताए। ब्रrामास जगह में रौबिंसन क्रूसो आईलैंड पर चार दिन स्टोन एज की तरह बिताए। पत्थरों से आग निकालने से लेकर फल-फूल खाकर गुजारा करना सुप्रीत का सबसे अच्छा अनुभव है। स्वीडन, डेनमार्क, फ्रांस, स्पेन, पुर्तगाल, यूएसए, कनाडा और ब्रहमास जैसी जगहों पर सुप्रीत एडवेंचरस ट्रिप कर चुकी हैं।
पहले दिन ट्रैकिंग कर के काफी थक गई थी। ट्रैकिंग करने से पता चला कि इससे बेहतर कुछ नहीं। शुरू से ही एडवेंचरस एक्टीविटीज करने का शौक था। जब कैट क्लब के बारे में जाना तो तुरंत जॉइन कर लिया। नेचर को करीब से जानने का मौका मिला। अब लेह-लद्दाख में ट्रैकिंग का मन करता है।
-गुरप्रीत, फोर्टिस, मोहाली में कार्यरत।
स्कूल टाइम से ट्रैकिंग करती थी। डलहौजी, कुल्लू-मनाली और चंद्राखनी पास पर बचपन में ट्रैकिंग कर चुकी हूं। पति, बेटे और बेटी के साथ कैट क्लब जॉइन किया है। ट्रैक वीकएंड्स पर होता है, इससे फैमिली मेंबर्स को सूट करता है। बच्चों को प्रकृति से मिलाने का यह अच्छा तरीका है। अब माउंट एवरेस्ट पर ट्रैक करने की ख्वाहिश है। -पुनीता संधू, टीचर, वाईपीएस
पैरा सेलिंग, रिवर राफ्टिंग कर चुकी हूं। अब ट्रैकिंग पर ध्यान दे रही हूं। इससे प्राकृतिक सुंदरता को करीब से जानने और समझने का यह बेस्ट मौका है। -मोनिका भाटिया, वर्किंग।