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आरोपियों की जमानत खारिज

बीकानेर. अरबन कॉ-ऑपरेटिव बैंक में करोड़ों रुपए की अनियमितता के मुख्य आरोपियों की अग्रिम जमानत कार्यवाहक सेशन जज ने खारिज कर दी है। बैंक के तžकालीन अध्यक्ष शिवशंकर पुरोहित व मुख्य कार्यकारी अधिकारी पूनमचंद पुरोहित ने तीन अलग-अलग मामलों में सेशन कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था। न्यायाधीश ने सुनवाई के बाद प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए तीनों मामलों में आरोपियों की जमानत खारिज कर दी।

न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि बैंक से अवैध रूप से उठाई गई राशि के संबंध में हाईकोर्ट के निर्देशों की पालना नहीं की गई है। अन्य आरोपों को भी गंभीरता से लेते हुए न्यायाधीश ने कहा कि लोक निधि की राशि का व्यक्तिगत उपयोग के लिए गबन किया गया है। लोक अभियोजक की ओर से कहा गया है कि अनुसंधान अधिकारी को आरोपियों को गिरफ्तार कर फर्जी भुगतान से संबंधित बाउचर, लेजर चैक व गायब किए गए अन्य बैंक रिकार्ड बरामद करना है।

गौरतलब है कि बैंक में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता रघुनाथ सुथार, लक्ष्मणप्रसाद शर्मा व तीर्थराज भारद्वाज ने कोटगेट पुलिस थाने में तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज करवाए थे। मुकदमों में आरोप है कि अध्यक्ष शिवशंकर पुरोहित ने अपने भतीजे दिनेश कुमार के नाम से नौ दिसंबर, 2003 को 50 हजार, चन्द्रराज जैन के नाम से 25 हजार, प्रभुदयाल के नाम से एक लाख 90 हजार, 11 अगस्त, 2001 को मां शांतिदेवी के नाम से एक लाख 35 हजार, श्रीमती चन्द्रकला के नाम से 90 हजार, विनोद कुमार के नाम से एक लाख 50 हजार, पुत्र हेमचन्द के नाम से दो लाख रुपए की ओवरड्राफ्ट लिमिट रहते हुए 23 लाख रुपए से अधिक की राशि उठा ली।

इस खाते की मूल पत्रावली व हस्ताक्षर कार्ड बैंक से गायब हैं। ग्यारसीलाल के सीसी खाते में 25 हजार रुपए की लिमिट के बावजूद पांच लाख 36 हजार रुपए से अधिक राशि बैंक से उठा ली। आरोपी शिवशंकर ने अपने पुत्र कीर्ति कुमार के सीसी खाते में बिना गारंटी के 69,320 रुपए उठा लिए।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी पूनमचंद पुरोहित ने अपने पिता शंकर पुरोहित के नाम से एफडीआर नहीं होने के बावजूद 6,80,750 रुपए तथा मां शांतिदेवी के नाम से तीन लाख 20 हजार रुपए का ऋण उठा लिया। कोर्ट में राज्य की ओर से पैरवी लोक अभियोजक दाऊलाल हर्ष ने की।





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