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पहले दिन 8000 दस्तावेजों की जांच

बीकानेर. राजस्थान लोक सेवा आयोग से चयनित बीएड डिग्रीधारकों के दस्तावेजों की जांच का काम सोमवार को शुरू हुआ। पहले दिन करीब आठ हजार अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का मिलान किया गया। शिक्षा विभाग में करीब 18 हजार बीएड डिग्रीधारकों को तृतीय श्रेणी शिक्षक के पदों पर 12 जनवरी तक नियुक्तियां दी जाएंगी। दस्तावेजों की जांच नौ जनवरी तक होगी। पहले दिन प्रत्येक जिले में कम से कम ढाई सौ अभ्यर्थियों के फार्मो के साथ संलग्न दस्तावेजों का मिलान मूल दस्तावेजों के साथ किया गया।

जांच के लिए प्रारंभिक शिक्षा आयुक्तालय ने सभी डीईओ को एक चैकलिस्ट थमाई है, जिसमें मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय, आरक्षण का प्रमाण-पत्र, अनुसूचित जनजाति एरिया सहित सभी बिन्दुओं पर फार्मो को परखा जा रहा है। यह भी देखा जा रहा है कि अभ्यर्थी ने 10वीं के बाद सीधे ही बीए तो नहीं कर रखी है। 12वीं में व्यावसायिक शिक्षा तो नहीं थी।

पत्राचार से ली गई योग्यता कहीं प्रतिबंधित काल की तो नहीं थी। जिला शिक्षा अधिकारियों को दूसरे राज्यों के मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों की सूची भी दी गई है। उसके अलावा किसी अन्य विश्वविद्यालय की डिग्री को संदेह के आधार पर रोकने का कहा गया है। उसकी विस्तृत जांच करवाई जाएगी। आयुक्तालय में दिनभर पर्यवेक्षकों से सूचनाएं एकत्रित की गई।

नहीं मिला कॉल लेटर
कॉल लेटर नहीं मिलने की समस्या लगभग सभी जिलों में रही। प्रारंभिक शिक्षा आयुक्तालय से मिली जानकारी के अनुसार प्रत्येक जिले में तीन-चार अभ्यर्थी पहले दिन अनुपस्थित रहे। इन अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच अब बाद में होगी।

जांच कार्य के दौरान अनुपस्थित रहने से उनकी नियुक्ति प्रभावित नहीं होगी। राज्य में दूसरे जिलों के अभ्यर्थियों के कई अभ्यर्थियों को कॉल लेटर देरी से मिले। कुछ ऐसे भी हैं, जिन्हें कॉल लेटर ही नहीं मिले। वे टेलीफोन से अन्य किसी माध्यम से सूचना मिलने पर दस्तावेजों सहित पहुंचे।

>> दस्तावेजों की जांच का काम शुरू कर दिया गया है। डीईओ को बारीकी से जांच के निर्देश दिए गए हैं। उसके बाद नियुक्ति आदेश जारी होंगे। अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए कई जिलों में बेहतर इंतजाम किए गए हैं।
आर.एस.रघुवंशी, अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन)

रात तक जारी था काम
बीकानेर में दस्तावेजों की जांच का काम रात तक चला। राजकीय गंगा बाल उच्च प्राथमिक विद्यालय में पांचों बीईईओ के अलग-अलग दल गठित कर दस्तावेजों का मिलान किया गया। प्रत्येक ब्लॉक के पांच-पांच के दल गठित किए गए हैं। पहले दिन करीब ढाई सौ अभ्यर्थियों के फार्मो की जांच की गई।

जांच के दौरान स्कूल का मुख्यद्वार बंद कर दिया गया। अभ्यर्थियों को मेरिट के अनुसार बुलाया जा रहा था। बिहार के दरभंगा और गुजरात सहित संदेहास्पद की श्रेणी वाले विश्वविद्यालयों की डिग्रियों को रोक लिया गया है। बिहार के डिग्रीधारी कुछ अभ्यर्थी मूल दस्तावेज लेकर नहीं पहुंचे थे। उनकी अब विस्तृत जांच होगी।

जांच में भी सिफारिश भड़के अधिकारी
बीएड डिग्रीधारकों के दस्तावेजों की जांच के दौरान राजकीय गंगा बाल विद्यालय में अव्यवस्थाओं का आलम रहा। प्रारंभिक शिक्षा आयुक्तालय के अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन) निरीक्षण के दौरान अव्यवस्थाओं को देख भड़क उठे।

दस्तावेजों की जांच के दौरान लोग सिफारिशें लेकर पहुंच रहे थे। आलम यह था कि पहुंच वाले अभ्यर्थियों के रिश्तेदार या मित्र पर्चियां लेकर जांच कक्ष में सीधे अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क कर रहे थे। दो सौ से अधिक अभ्यर्थी स्कूल के अंदर और बाहर जमा थे लेकिन उनके लिए पेयजल तक की व्यवस्था नहीं थी। महिला अभ्यर्थियों को पूरे दिन खड़े रहना पड़ा।

प्रारंभिक शिक्षा आयुक्तालय के अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन) आर.एस.रघुवंशी दोपहर करीब 12 बजे स्कूल पहुंचे तो अव्यवस्थाओं को देख भड़क उठे तथा डीईओ कार्यालय के एक कार्मिक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तक की चेतावनी दे डाली।

जांच कार्य के निरीक्षण के दौरान भी उन्होंने कई खामियां निकाल दी तथा पर्यवेक्षक महफूज अली और डीईओ तेजासिंह को तत्काल व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए। अभ्यर्थियों के परिचितों को स्कूल से बाहर कर दिया। इनमें शिक्षा विभाग के कुछ कर्मचारी भी शामिल थे। शहर भाजपा के जिला मंत्री युधिष्ठिरसिंह भाटी सहित कुछ नेता भी स्कूल पहुंचे लेकिन उन्हें भी वापस बाहर कर दिया गया।

शिक्षा विभाग के ऐसे कई कर्मचारी वहां मौजूद थे, जिनकी ड्यूटी जांच कार्य में नहीं थी। उन सभी को वहां से हटा दिया गया। जांच दल में चुनिंदा अध्यापिकाओं को भी लगाया गया है लेकिन उनसे कोई काम नहीं लिया जा रहा। एसडीआई बैठे रहने के बजाय इधर-उधर घूम रहे थे।

अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच का काम सुबह दस बजे के बाद शुरू हुआ था। केवल महिला अभ्यर्थियों को ही अंदर प्रवेश दिया गया। पुरुष अभ्यर्थियों को स्कूल के बाहर ही रुकना पड़ा। मुख्य द्वार बंद कर दिया गया। उन्हें मेरिट के अनुसार बुलाया जा रहा था। अभ्यर्थियों के बैठने और पेयजल आदि प्रबंध तथा व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश देने के बाद अतिरिक्त निदेशक वापस लौट गए।





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