Vaama
Relationships Relationships आपस की बात मेरी बुआ की बेटी हैं। उनसे प्राय: फोन पर लंबी बातें होती हैं। उनके पति बहुत अच्छी पोस्ट से लगभग 10 वर्ष पूर्व रिटायर हो गए हैं। पिछले सप्ताह फोन पर हुई बातचीत में पता नहीं कहां से बोर होने की बात पर चर्चा शुरू हो गई। उन्होंने बताया कि उनकी हम उम्र महिलाएं जब भी मिलती हैं तो प्राय: कई बार वे कहती हैं कि बहुत बोर हो जाते हैं।
बहुत उकताहट-सी होती है। कभी-कभी तो समय काटना ही मुश्किल हो जाता है। दीदी (पंजाबी में तो भैणजी कहते हैं) ने अपना मत देते हुए कहा कि मेरी समझ में नहीं आता कि कोई अपने ही घर में कैसे बोर हो सकता है? उनकी बात ने विचारों की लंबी प्रक्रिया शुरू कर दी। उनकी बात काफी हद तक सही थीं।
यदि शारीरिक और मानसिक रूप से आप स्वस्थ्य हैं तो बोर होने का या उकताहट होने का प्रश्न ही नहीं उठता। यदि अपने घर में रहकर समय काटना मुश्किल हो रहा है तो जाहिर है कि उस घर, उसकी दीवारों, उसकी आवाजों से आपका अपना लगाव कम हो गया है।
यह लगाव मोह नहीं होता। यह लगाव उस सारे श्रम, कोशिशों और आपकी उन नजरों के प्रति एक प्रशंसा का भाव होता है जिसमें अपनी सोच और सूझ-बूझ जुड़ी होती है। स्वस्थ्य शरीर और मन ईश्वर का वरदान है। वहां सबसे पहले बोर होने के लिए मना करता है। उसके लिए जितने धन्यवाद दिए जाएं कम हैं। घर की सुबह सबेरे खिड़की खोलते, उसमें से आती सूरज की किरणो बोर होने से रोकती हैं।
फिर तो घर की दिनचर्या का नियमित कार्यक्रम शुरू हो जाता है। वह चाहे रोज की बातें होती हैं पर हर दिन उसमें कुछ नया जुड़ा होता है। काम वाली बाई की बातें, फोन पर किसी परिचित का स्वर, बगाों का संदेश या उनकी कोई गतिविधि, सब कुछ तो मन बहलाने के लिए काफी है। कोई अपने घर में बोर हो ही नहीं सकता। घर से तो प्यार और स्नेह की डोर बंधी होती है। उसकी दीवारों से बहुत सारी बातें कही और सुनी होती हैं।
वह आपसे शेयर करता है। यहां आपको बोर होने से बचाने के पारंपरिक सुझाव और समझाइश नहीं दी जा रही कि अपनी हॉबी ढूंढ़े, उससे जुड़े, अच्छी बुक्स और पत्रिकाएं पढ़ें, बागवानी करंे या फ्रेंड्स सर्कल बनाएं। केवल एक ही सुझाव है। घर से प्यार करें। वह उसका साथ, उसका सहयोग बोर होने ही नहीं देगा।
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