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2600 गांवों में राहत कार्य नहीं

जयपुर. प्रदेश के 4309 गांवों को अकालग्रस्त घोषित करने के बावजूद राज्य सरकार इनमें से 2617 गांवों में राहत के रूप में श्रम संबंधी काम शुरू नहीं करेगी। सरकार का फैसला है कि जिन जिलों में राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना लागू है, उनमें श्रमिक नहीं लगाए जाएंगे, क्योंकि वहां पहले ही श्रमिकों को काम दिया जा रहा है।

राज्य सरकार का कहना है कि 12 जिलों के अकालग्रस्त 4309 गांवों में पानी-चारे संबंधी राहत के काम बाद में शुरू होंगे, लेकिन 1692 गांवों में 11 जनवरी से राहत काम शुरू होंगे। इन इलाकों में श्रमिकों को नकद और गेहूं के रूप में भुगतान किया जाएगा। जनवरी माह के लिए श्रमिक सीमा एक लाख रखी गई है। राज्य सरकार ने संवत 2064 की गिरदावरी रिपोर्ट मिलने के बाद मंगलवार को 12 जिलों के चयनित गांवों में अकाल घोषित किया था।

राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना वाले जिले

बांसवाड़ा, बाड़मेर, चित्तौड़, डूंगरपुर, जैसलमेर, जालौर, झालावाड़, करौली, सवाई माधोपुर, सिरोही, टोंक, उदयपुर।

राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना वाले जिलों में अकाल राहत के तहत समांतर काम नहीं कर सकते। इसलिए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है कि वे दोनों काम साथ-साथ शुरू करने की अनुमति दें।
-लक्ष्मीनारायण दवे, राहत मंत्री

यह फैसला अकाल पीड़ितों से मजाक : डे

रोजगार गारंटी योजना अभियान के निखिल डे ने कहा कि राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना वाले जिलों में अकाल राहत के तहत श्रमिक नहीं लगाने का फैसला गलत है। योजना में किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं है। यह सब योजनाओं के अलावा रोजगार गारंटी की स्वतंत्र योजना है।

सरकार के फैसले से साफ पता चलता है कि उसकी अकाल पीड़ितों से कोई सहानुभूति नहीं है। सरकार अकाल पीड़ित लोगों के लिए यह पैसा इस लालच में खर्च नहीं करती क्योंकि साल के आखिर में यह पैसा राज्य बजट में शामिल हो जाता है।





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