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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. ध्वनि प्रदूषण के मामले में अफसरों की रिहायश वाले आवासीय क्षेत्र गांधी रोड की स्थिति भी महाराज बाड़ा व फूलबाग, रेलवे स्टेशन की तरह ही है। इस मार्ग पर ध्वनि प्रदूषण का प्रमुख कारण यहां से गुजरने वाले सवारी व निजी वाहनों को माना गया है।
मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय को अध्यक्ष राजस्व मण्डल एससी वर्धन ने दूरभाष पर शिकायत की थी कि उनके बंगले के आसपास ध्वनि प्रदूषण अधिक है। श्री वर्धन की इस शिकायत पर बोर्ड के कनिष्ठ वैज्ञानिक संजीव सक्सेना व मुख्य रसायनज्ञ आरएस भावसार गांधी रोड स्थित बंगले पर पहुंचे और दोपहर में ही ध्वनि प्रदूषण की जांच की।
जांच में पाया कि बंगले के मुख्य प्रवेश द्वार के पास न्यूनतम ध्वनि स्तर 73 डीबीए है तथा अधिकतम 82 डीबीए। यहां पर औसत ध्वनि प्रदूषण 76.4 निकला जबकि 55 डीबीए होना चाहिए।
जांच दल ने राजस्व मण्डल अध्यक्ष के बंगले के मध्य भाग (लॉन) में भी दोपहर दो बजे से अपराह्न साढ़े तीन बजे के बीच ध्वनि प्रदूषण की जांच की। यहां न्यूनतम 58 जबकि अधिकतम 68 डीबीए ध्वनिस्तर मापा गया। निवास भवन के बाहर भी ध्वनि प्रदूषण न्यूनतम 56 तथा अधिकतम 67 डीबीए निकला है जबकि होना चाहिए 55 डीबीए।
जांच अधिकारियों ने रिपोर्ट में कहा है कि ध्वनि प्रदूषण के लिए इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा है कि गांधी रोड से प्रति मिनट 40 से 60 वाहन गुजरते हैं। ध्वनि प्रदूषण के लिए इन वाहनों का पुराना होना व इनमें प्रेशर हॉर्न लगा होना ही मुख्य वजह है।
कार्रवाई करे कौन?
गांधी रोड पर ध्वनि प्रदूषण अधिक होने की बात प्रमाणित होने के बाद भी मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का स्थानीय अमला कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है। इस मामले में मुख्य रसायनज्ञ ने कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक को रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराते हुए कहा है कि शहर में पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 के तहत ध्वनि प्रदूषण नियम 2000 लागू है।
इस नियम के क्रियान्वयन का अधिकार कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक के कार्य क्षेत्र में आता है। इससे साफ है कि अब ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए उक्त दोनों अधिकारियों को कार्रवाई करना है।