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Bilaspur Bilaspur बिलासपुर.
सूर्य के स्थान परिवर्तन के कारण मकर संक्रांति इस बार 15 जनवरी को मनाई जाएगी। परंपरागत तौर पर इसे देवताओं का दिन माना गया है, इसलिए संक्रांति से ही शादी-ब्याह, गृह प्रवेश आदि मांगलिक कार्यो की शुरुआत हो जाएगी। संक्रांति के पुण्यकाल के दौरान स्नान, पूजा और दान किया जाएगा। इस दिन तिल, गुड़ आदि का सेवन करना पुष्टिकारक माना जाता है।
इस मान्यता के चलते लोग तिल के लड्डूरिश्तेदारों और परिचितों को दान करेंगे। घरों में महिलाएं पर्व की तैयारियों में जुट गई हैं। सूर्य देवता के धनु राशि से मकर राशि में संक्रमण यानी प्रवेश को मकर संक्रांति कहा जाता है। यह पर्व दक्षिण भारत में ‘पोंगल’ के नाम से मनाया जाता है। ज्योतिष पं. दीपक शर्मा ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाएगा और उनकी गति दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर होगी।
शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य के दक्षिणायन रहने के दौरान जुलाई से जनवरी के मध्य तक के छह महीनों को देवताओं का शयनकाल कहा जाता है। मकर संक्रांति से देवताओं का जागरण काल शुरू होगा। 30 वर्षो बाद इस बार मकर संक्रांति विशेष होगी, क्योंकि इस दिन सूर्य देव व शनि का स्थान परिवर्तन योग भी निर्मित होगा। 15 जनवरी की सुबह 5.55 बजे सूर्य शनि की मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिसका विशेष ज्योतिषीय महत्व होगा।
पं. शर्मा के अनुसार सूर्य व शनि के स्थान परिवर्तन से सिंह व मकर राशि के जातकों को सर्वाधिक लाभ होगा। सूर्य व शनि से संबंधित क्षेत्रों जैसे चिकित्सा, औषधि, लौह पदार्थो, कोयला, तैलीय पदार्थो, राजनीति, समाजसेवा व प्रशासनिक कार्यो में तेजी आने की संभावना है। शासन से संबंधित व्यक्तियों व निर्णयों में भी तीव्रता आएगी, वहीं अप्रिय व हिंसक घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।
मेष, वृषभ, मिथुन व कर्क राशि के जातकों को शुभ समाचार मिलेगा, वहीं कन्या, तुला राशि वालों को संतान व संपत्ति संबंधी लाभ होगा। वृश्चिक, धुन वालों के लिए विवाह व मांगलिक कार्यो में सफलता और कुंभ, मीन के जातकों के कार्यक्षेत्र में वृद्धि के योग बनेंगे। इधर मकर संक्रांति पर पुण्य स्नान करने के लिए बड़ी संख्या में लोग तीर्थस्थलों के लिए रवाना होने लगे हैं। इस दिन बड़ी संख्या में लोग अमरकंटक भी जाएंगे, जहां नर्मदा नदी में स्नान किया जाएगा।
मकर संक्रांति पर क्या करें
पुण्यकाल में यथासंभव पवित्र नदी में स्नान करें।प्रात:काल तिल के उबटन से स्नान कर सूर्यदेव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करें।सूर्योदय के समय ‘ओम् घृणि सूर्याय नम:’ मंत्र का 108 बार जाप करें।तिल के लड्डू और तिल की खिचड़ी का सेवन करें।गरीबों को तिल से निर्मित पदार्थो व कंबल का दान करें।शिवलिंग पर जल, कच्च दूध, शहद, पंचमेवा,दही, फल व तिल चढ़ाएं।