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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष यशवंत तिवारी ने बुधवार को उपाध्यक्ष अवध त्रिपाठी को एसोसिएशन की सदस्यता से निलंबित कर दिया। उधर उनके द्वारा काज लिस्ट में जारी किए गए नोटिस की भाषा पर आपत्ति जताते हुए वकील निरुपमा वाजपेयी ने कार्यवाहक चीफ जस्टिस सहित अन्य को पत्र लिखा है। एसोसिएशन के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष मंगलवार की शाम को बार एसोसिएशन के दफ्तर में भिड़ गए थे।
इसके बाद अध्यक्ष श्री तिवारी ने उपाध्यक्ष श्री त्रिपाठी पर पीटने का आरोप लगाते हुए थाने में रिपोर्ट लिखा दी। श्री त्रिपाठी ने भी अध्यक्ष पर जान से मारने की धमकी व गाली-गलौच करने की रिपोर्ट कोतवाली थाने में दर्ज कराई। फिर भी मामला ठंडा नहीं हुआ। श्री तिवारी ने हाईकोर्ट के काजलिस्ट में श्री त्रिपाठी को एसोसिएशन की सदस्यता से निलंबित करने की सूचना जारी की है।
इसके अनुसार निलंबन अवधि तक उन्हें एसोसिएशन के दफ्तर में घुसने की इजाजत भी नहीं रहेगी। अपने प्रशासनिक अधिकारों का उपयोग करते हुए श्री तिवारी जो कार्रवाई की है, वहां तक तो ठीक है, लेकिन सूचना में जिस भाषा का उपयोग किया गया है, उस पर हाईकोर्ट के अधिकतर वकीलों ने आपत्ति जताई है।सूचना में श्री त्रिपाठी पर गाली-गलौच देने का आरोप लगाते हुए जिस गाली का उल्लेख किया है, वह अश्लीलता की श्रेणी में आती है।
इसे पढ़ने के बाद वकीलों में तीखी प्रतिक्रिया है। वहीं एसोसिएशन की सदस्य निरुपमा वाजपेयी ने तो इसके खिलाफ हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस, बार एसोसिएशन और बार कौंसिल के चेयरमेन को पत्र लिखकर अपनी पीड़ा व्यक्त की है। पत्र में उन्होंने कहा है कि वकील संभ्रात और प्रतिष्ठित व्यक्तियों की श्रेणी में आते हैं। इसके अलावा काज लिस्ट को भी वकीलों के अलावा पक्षकार और मामलों के संबंध में जानकारी चाहने वाले भी पढ़ते हैं।
उसमें ऐसी भाषा का उपयोग करना आपत्तिजनक और मानसिक पीड़ा पहुंचाने वाला है। उन्होंने कहा है कि ऐसी बातों की भविष्य में पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। आल इंडिया लायर्स यूनियन ने की निंदा: वकीलों के अखिल भारतीय संगठन आल इंडिया लायर्स यूनियन की प्रदेश इकाई ने कल एसोसिएशन के दफ्तर में हुई मारपीट और गाली-गलौच की निंदा की है।
उन्होंने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि समाज के सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे लोगों के संगठन के पदाधिकारियों के बीच इस तरह की घटना ने वकील समुदाय की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने इस घटना में लिप्त लोगों पर बार कौंसिल के माध्यम से कार्रवाई करने की जरूरत बताते हुए कहा है कि प्रदेश के 19 हजार वकीलों ने जिन प्रतिनिधियों को जिस विश्वास से चुना था, इस घटना से उसे ठेस पहुंची है।
उन्होंने हाईकोर्ट के सीनियर वकीलों से मामले में हस्तक्षेप कर स्थिति को और बिगड़ने से बचाने को कहा है। बयान जारी करने वालों में यूनियन के प्रांतीय महासचिव शौकत अली, वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रभाकर सिंह चंदेल, कोषाध्यक्ष आर मुखोपाध्याय, रजनीश बघेल, विजय स्वर्णकार आदि शामिल हैं।
अनुशासन कमेटी बनेगी
एसोसिएशन की ओर से इस तरह के मामलों की सुनवाई और उन पर कार्रवाई के लिए अनुशासन कमेटी बनाने की तैयारी भी की जा रही है। इसके लिए एसोसिएशन के कुछ सदस्यों को अध्यक्ष ने पत्र लिखकर इसमें शामिल होने के लिए उनकी सहमति चाही है। सहमति मिलने के बाद इस कमेटी का गठन किया जाएगा।
सुलह की कोशिश भी
हाईकोर्ट के वकीलों में यह भी चर्चा रही कि मामले में दोनों पक्षों की रिपोर्ट के बाद सुलह-समझौते की कोशिश भी तेज हो गई है। प्रकरण में कुछ वरिष्ठ वकीलों द्वारा प्रयास किए जाने की जानकारी मिली है। इस घटना से हाईकोर्ट के जजों में भी अच्छा संदेश नहीं गया है।