डूंगरपुर.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाले डूंगरपुर जिले की आदिवासी प्रतिभाओं की दुर्गति देखनी हो तो तीरंदाज नरेश डामोर की हालत देख ली जाए। कई अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय खेलों में अपनी अचूक निशानेबाजी का लोहा मनवा चुका यह युवा तीरंदाज अगले राष्ट्रमंडल खेलों का लक्ष्य भेदने के लिए धनुष-बाण तक को तरस रहा है।
अभावों में पले जिले के आड़ीवाट गांव का निवासी नरेश डामोर तीरंदाजी जगत में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान स्थापित कर चुके हैं। उसकी बदहाली की दास्तां यह है कि उसके पास दिल्ली में आयोजित होने वाले आगामी राष्ट्रमंडलीय खेलों की तैयारी करने के लिए धनुष व बाण तक नहीं है। बगैर तीर कमान के वह अगली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में वागड़ अंचल के साथ ही राज्य का नाम कैसे रोशन कर सकेगा।
इसकी सुध न तो राज्य सरकार ले रही है और न ही स्थानीय जनप्रतिनिधि व अफसर। वर्ष 2006 में महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन के महाराणा प्रताप व अरावली अवार्ड से सम्मानित हो चुके तीरंदाज नरेश के समक्ष बेरोजगारी के कारण पहले ही पेट पालने का संकट है।
धनुष की लागत साढ़े तीन लाख
डूंगरपुर। अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में अचूक निशाने के लिए काम में लिए जाने वाले धनुष की कीमत ही करीब साढ़े तीन लाख रुपए है। प्रतियोगिता से पूर्व प्रेक्टिस के लिए उपयोग में लिए जाने वाला धनुष डेढ़ लाख रुपए तक की राशि में उपलब्ध हो जाता है। धनुष के साथ बारह तीरों का सेट आता है। इन तीरों का मूल्य बीस हजार रुपए है। यह तीर भी कुछ समय तक काम में आने के बाद अनुपयोगी हो जाते हैं।
गत वर्ष चौरासी विधायक सुशील कटारा ने एमएलए कोटे से डेढ़ लाख रुपए की कीमत का धनुष-बाण जिला खेल अधिकारी प्रेमचंद शर्मा को भेंट किया था। शर्मा ने उक्त धनुष-बाण नरेश को उपलब्ध कराया था। करीब एक साल तक तीरंदाजी में उपयोग आने से अब इस धनुष से निशानेबाजी सटीक नहीं रही।
अब तक की उपलब्धियां
1. बैंकोक में वर्ष 2005 में एशियाई तीरंदाजी ग्रेंड प्रिक्स प्रतियोगिता में कांस्य पदक तथा व्यक्तिगत स्पर्धा में पांचवां स्थान।
2. इंडोनेशिया के जकार्ता शहर में वर्ष 2005 में आयोजित थर्ड एशियन ग्रेंड प्रिक्स प्रतियोगिता में रजत पदक तथा व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य पदक जीता।
3. नई दिल्ली में वर्ष 2005 में आयोजित 14 वीं एशियाई तीरंदाजी चेंपियनशिप में गोल्डमेडल विजेता।
4. थाइलेंड के बेंकाक शहर में वर्ष 2006 में आयोजित फस्र्ट एशियन ग्रेंड प्रिक्स प्रतियोगिता में गोल्डमेडल विजेता।
राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में उपलब्धियां इस तरह रही।
1. वर्ष 1997 में सीनियर नेशनल प्रतियोगिता में कांस्य पदक। जूनियर नेशनल प्रतियोगिता में दो सिल्वर व एक कांस्य पदक।
2. वर्ष 1998 में चंडीगढ़ में आयोजित जूनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में एक गोल्ड, दो रजत व एक कांस्य पदक।
3. वर्ष 1999 में विजयवाड़ा में एक कांस्य पदक।
4. वर्ष 2004 में जमशेदपुर में आयोजित सीनियर नेशनल प्रतियोगिता में पांच रजत पदक।
5. वर्ष 2005 एमाकुलम में आयोजित सीनियर नेशनल गेम्स में एक गोल्ड, तीन सिल्वर मेडल।
6. कोलकाता में वर्ष 2006 में आयोजित सीनियर नेशनल प्रतियोगिता में दो गोल्ड, दो कांस्य पदक।
एक सरकारी नौकरी की तलाश
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीरंदाजी के क्षेत्र में पहचान कायम करने वाले धनुर्धर नरेश डामोर के समक्ष चुनौतियां कम नहीं है। तीरंदाजी के साथ ही उसे एक अदद सरकारी नौकरी की तलाश भी है। उसने मुख्यमंत्री, गृहमंत्री के समक्ष राजकीय सेवा में नौकरी के लिए प्रस्ताव भी रखा था। जनजाति विभाग के खेरवाड़ा में स्थित केंद्र पर तीरंदाजी प्रशिक्षक के रूप में नियुक्ति की मांग भी की, लेकिन अब तक कोई सहयोग नहीं मिला। नरेश का कहना है कि नौकरियां तो कुछ और भी मिली थी, लेकिन उनमें काम करते हुए उसे तीरंदाजी की प्रेक्टिस के लिए समय नहीं मिल पा रहा था। ऐसे में उसकी तीरंदाजी खत्म हो जाती। इसलिए उन नौकरियों को छोड़ देना उचित समझा।