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छतबीड़ जू में घड़ियाल ब्रीडिंग

चंडीगढ़. छतबीड़ जू के ब्रीडिंग प्रोग्राम की कड़ी में एक नया नाम ‘घड़ियाल’ का भी जुड़ने जा रहा है। गर्मियों में अबकी बार जू अथॉरिटी घड़ियालों की संख्या में इजाफा करने का प्रयास करेगी। यूं तो छतबीड़ में घड़ियालों की मौजूदगी काफी समय से है, लेकिन इनकी ब्रीडिंग को लेकर खास ध्यान नहीं दिया गया।

अब जू अथॉरिटी की योजना इनकी सही तरीके से ब्रीडिंग करवाने की है। इस योजना के तहत घड़ियालों को अनुकूल माहौल देने का प्रयास किया जाएगा। जू में घड़ियाल की ब्रीडिंग को लेकर यह पहला प्रयास है। गत वर्ष प्राकृतिक तौर पर ही प्रजनन के बाद कोई भी नन्हा घड़ियाल बच नहीं सका।

अब जू अथॉरिटी ने भी प्रजनन को लेकर खास बंदोबस्त करने शुरू कर दिए हैं। इस समय में जू में एक नर सहित चार घड़ियाल हैं। प्रजनन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती इनके अंडों को सहेजने की होती है।

पिछले साल तो नर घड़ियाल ने ही अंडों को नुकसान पहुंचाया था। अथॉरिटी ऐसा इंतजाम करना चाहती है जिससे अंडों और बच्चों को नुकसान न पहुंचे। इसके लिए रेत व पानी का अच्छी मात्रा में बंदोबस्त किया जा रहा है और नर को भी अंडों से दूर रखने का इंतजाम है। हरीके वेटलैंड में छोड़ने पर भी विचार: घडियालों को हरीके पतन वेटलैंड में छोड़ने पर भी विचार किया जा रहा है।

पंजाब स्टेट बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ ने भी इसे लेकर प्लानिंग बनाई थी, लेकिन अभी तक यह प्लानिंग अमल में नहीं आई है। इस तरह छतबीड़ जू में घड़ियालों की संख्या में इजाफा होने से इन्हें राज्य की वेटलैंड्स में छोड़ने पर भी विचार किया जा सकता है। वाइल्ड लाइफ एक्ट के शेड्यूल वन में शामिल घड़ियाल नॉर्थ इंडिया में काफी कॉमन हैं। देश में पहली बार घड़ियालों की ब्रीडिंग उड़ीसा के नंदन कानन बायोलॉजिकल पार्क में की गई थी।

हम अपने स्तर पर घड़ियालों के प्रजनन को लेकर पूरी तरह से प्रयासरत हैं। हमारी कोशिश इनको अनुकूल माहौल देने की है ताकि ये अपनी प्रजनन प्रक्रिया सेफ तरीके से पूरी कर सकें। इसके लिए पूरी प्लानिंग तैयार कर ली गई है। उम्मीद है अबकी बार गर्मियों में बेहतर नतीजे सामने आएंगे। -धर्म्ेद्र शर्मा, डायरेक्टर, छतबीड़ जू





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