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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. मामला डीआईजी की बेटी का था, इसलिए शहर के एसएसपी यूटी से लेकर एसएसपी ऑपरेशन तक उनके घर पर तैनात रहे। शहर की पुलिस सड़कों पर उनकी बेटी को तलाशती रही। पुलिस ने वह हर मुमकिन कोशिश की,जो वो कर सकती थी।
इसके विपरीत आम आदमी का बच्चा, बहू या बेटा गायब हो, तो पुलिस बेपरवाह रहती है। पुलिस इसके लिए कोई बड़ा कदम नहीं उठाती है। हाल यह है कि २00७ में कुल 116लोग शहर से मिसिंग हुए, जिनमें बच्चों से लेकर बड़े तक शामिल हैं, लेकिन इनको ट्रेस करने के लिए शहर की पुलिस ने आज तक कोई कदम नहीं उठाया।
उनके लिए सिर्फ गुमशुदगी की डीडीआर दर्ज करके औपचारिकता पूरी करती है, जिसकी कॉपी परिजनों के हाथों में थमा दी जाती है। कोई खोया हुआ, खुद या रिश्तेदारों की मदद से लौट आए तो ठीक, नहीं तो पिछले साल पुलिस किसी को नहीं ढूंढ पाई।
पुलिस नहीं, बाप तलाश रहा पंकज को..
सेक्टर-४१, मकान नंबर-५९१ का पंकज (17 वर्ष) २८ जनवरी २क्क्७ से रहस्यमयी हालात में अपने घर से लापता है। थाना-३९ में पंकज की गुमशुदगी तो दर्ज है, लेकिन आज तक पुलिस ने उसको तलाशने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
पंकज की मां गंगा की फरियाद है कि जैसे डीआईजी की बेटी को ढूंढने के लिए पुलिस लगी रही, वैसे ही पंकज को भी तलाशा जाए। पंकज के पिता परस राम उसे ढूंढने के लिए हर महीने अलग-अलग शहरों में घूमते रहे हैं।