नई दिल्ली.देश में साइबर अपराधों से निपटने के लिए कॉरपोरेट घरानों का भरोसा पुलिस के बजाय निजी जासूसी संस्थाओं पर बढ़ता जा रहा है। कॉरपोरेट घराने और व्यक्तिगत स्तर पर लोग ऐसे मामलों की अज्छी तरह जांच कराना बेहतर समझते हैं, ताकि उनका मामला अदालत में ठहर सके।
फ्लॉपी में छेद कर डाला :
साइबर कानून विशेषज्ञों के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ लापरवाही बरतकर पुलिस कई साइबर मामलों को कमजोर कर चुकी है। साइबर अपराधों के अधिवक्ता पवन दुग्गल कहते हैं, ‘मैंने तो यह भी पाया है कि अज्ञानी पुलिस अधिकारी ने मामले के दस्तावेजों के साथ कंप्यूटर फ्लॉपी में छेद कर उसे नत्थी कर दिया है, जिससे अहम सबूत ही नष्ट हो गए हैं।’
बेटी को सौंपा कंप्यूटर :
दुग्गल बताते हैं, ‘एक अन्य मामले में मुंबई के शेयर दलाल से सबूत के रूप में डेस्कटॉप कंप्यूटर बरामद किया गया था। बाद में पता चला कि संबंधित पुलिस अधिकारी ने वही कंप्यूटर अपनी बेटी को सौंप दिया है।’ मुंबई की एनआईआई कंसल्टिंग के कंप्यूटर फोरेंसिक विशेषज्ञ कुश वाधवा कहते हैं, ‘मुंबई और पुणो से हमें मिलने वाले मामलों में 45 फीसदी ई-मेल ट्रेकिंग और ई-मेल आईडी चुराने के होते हैं।’