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चढ़ जा ट्रेनी पोल पर, चाहे लाइन का ना हो ज्ञान

बीकानेर. विद्युत कंपनियों में भर्ती हुए आईटीआई ट्रेंड कार्मिक कंपनी के लिए सिरदर्द साबित हो रहे हैं। एक तरफ जहां विद्युत निगमों में नियुक्ति पाने वाले कार्मिकों का पुलिस वैरीफिकेशन पूरा नहीं हुआ है वहीं दूसरी ओर इन लोगों को नियुक्ति के साथ ही लाइनें सुधारने के लिए पोल पर चढ़ा देने के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है।

पिछले तीन महीनों में राजस्थान में इस तरह की आठ-दस घटनाएं हो गई हैं जिसमें नवनियुक्त कार्मिक को पोल पर चढ़ा दिया गया और कार्मिक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। पिछले दिनों श्रीडूंगरगढ़ में हुआ हादसा भी इसी की एक कड़ी है। इस कार्मिक को इलाज के लिए जयपुर रैफर कर दिया गया है ।

जानकारों का कहना है कि आईटीआई ट्रेंड लोगों को लाइनों पर काम करने का पूरा अनुभव नहीं है और अधिकारी दबाव बनाकर इन्हें लाइनों को दुरुस्त करने के लिए पोल पर चढ़ा देते हैं। कुछ मामलो में तो यहां तक हुआ है कि इन कार्मिकों के पास 33 केवीए चौकी के अलावा कहीं भी काम नहीं करने का आदेश होने के बाद भी इन्हें फील्ड में भेजा गया है।

नवनियुक्त कार्मिकों का कहना है कि उन्हें अधिकारियों के दबाव में जहां काम के लिए कहा जाता है, करना पड़ता है लेकिन लगातार हो रही दुर्घटनाओं की वजह से डरे हुए हैं। कार्मिकों का कहना है कि वैरीफिकेशन आदि का काम नहीं होने के कारण उनकी तनख्वाह भी नहीं बनी है और इस वजह से दुर्घटना बीमा आदि का लाभ मिलना भी शुरू नहीं हुआ है।

इस बीच इस तरह की दुर्घटनाओं के कारण डर बैठ गया है। पता चला है कि श्रीडूंगरगढ़ में भी जो कार्मिक दुर्घटनाग्रस्त हुआ, उसकी तनख्वाह नहीं बनी थी। दुर्घटना के बाद आनन-फानन में उसे राशि भिजवाई गई।

>> लाइन पर काम करने के लिए भर्ती का पुराना पैटर्न ही सबसे सही है। कैजुअल, वर्कचार्ज, हैल्पर-द्वितीय और फिर हैल्पर। कंपनी कल्चर के कारण निगम ने एप्रोच से निजात पाने के लिए सीधी भर्ती का रास्ता अपनाया लेकिन यह कारगर नहीं है। पिछले तीन महीने में दस दुर्घटनाएं हो चुकी हैं जिसके लिए उत्तरदायी निगम प्रशासन है। जिन लोगों को लगाया गया है वे प्रेक्टीकली कोई ज्ञान नहीं रखते। तीन महीने से इनकी तनख्वाह रुकी हुई है। इस वजह से दूसरे परिलाभ भी नहीं मिल रहे हैं। अगर इनके वैरीफिकेशन का काम पूरा नहीं हुआ तो फिर इनसे काम भी क्यों लिया जा रहा है।
-रमेश व्यास, प्रदेशाध्यक्ष, प्रांतीय विद्युत मंडल मजदूर फैडरेशन (इंटक)

>> आईटीआई ट्रेंड लोगों को नियुक्त करने के पीछे यही सोच रहा कि प्रशिक्षित कार्मिक मिलेंगे। नियमानुसार निगम इन्हें कहीं भी नियुक्त कर सकता है। दुर्घटना कोई नहीं चाहता। एहतियात के तौर पर निगम ने भी इन्हें ट्रेनिंग दी है ताकि इन्हें किसी भी तरह की दिक्कत नहीं आए। जिन कार्मिकों के डाक्यूमेंट्स संबंधी कोई परेशानी नहीं है, उन्हें वेतन आदि मिलना शुरू हो गया है। जिनके डाक्यूमेंट्स बाकी हैं, उनके जमा कराते ही वेतन जारी हो जाएगा।
-बी.डी.मालू, संभागीय मुख्य अभियंता, जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड





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