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बोर्ड परीक्षा परिणाम कम रहने की जांच शुरू

बीकानेर. माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में रिजल्ट कम रहने संबंधी प्रकरणों की जांच शुरू कर दी गई है। शिक्षा विभाग ने इसे अपने 100 डेज प्रोग्राम में शामिल किया है। राज्य की माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्कूलों में 10वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम शिक्षा सत्र 2006-07 में मात्र 40 फीसदी ही रहा था। इससे पूर्व पिछले पांच साल से लगातार परीक्षा परिणामों के गिरावट आ रही है।

परीक्षा परिणाम कम रहने पर संबंधित विषय अध्यापकों, व्याख्याताओं को तथा स्कूल का परिणाम कम रहने पर हैडमास्टर और प्राचार्यो को 17सीसीए के नोटिस दिए गए हैं। माध्यमिक शिक्षा आयुक्तालय में इस तरह के तीन हजार से अधिक प्रकरण लंबित पड़े हैं, जिसकी वजह से संबंधित शिक्षकों को वेतन फिक्सेशन सहित कई तरह के लाभ नहीं मिल पा रहे। यह प्रकरण पिछले करीब तीन साल से लंबित हैं।

विभागीय जांच में फाइलों के ढेर लग चुके हैं। अनेक प्रकरणों में संबंधित द्वितीय श्रेणी शिक्षक, व्याख्याता, प्राचार्य और हैडमास्टर तो रिटायर हो चुका हैं।माध्यमिक शिक्षा के कार्यवाहक आयुक्त के.के.पाठक के निर्देश पर इसे राज्य सरकार के 100 डेज प्लान में फिलहाल दो सौ प्रकरणों को शामिल किया गया है तथा अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन) एफ.आर.सोनी को अभियान चलाकर तमाम प्रकरण निबटाने के निर्देश दिए हैं। प्रकरण वरिष्ठता के अनुसार निबटाए जाएंगे।

इससे कम रिजल्ट वालों को नोटिस
द्वितीय श्रेणी शिक्षक : 40 प्रतिशत या कम
व्याख्याता : 50 प्रतिशत या कम
हैडमास्टर (स्कूल) : 30 प्रतिशत या कम
प्राचार्य (स्कूल) : 40 प्रतिशत या कम

यह मिलेगा दंड
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा परिणाम कम रहने के 17 सीसीए के मामलों में असंचयी प्रभाव से इंक्रीमेंट रोका जा सकता है या परिनिंदा का दंड देकर छोड़ा जा सकता है। इन प्रकरण में उलझे शिक्षकों की डीपीसी, चयनित वेतनमान तथा रिटायर हो चुके शिक्षकों की पेंशन रुकी हुई है।

>> बोर्ड का परीक्षा परिणाम कम रहने के काफी प्रकरण लंबित हैं लेकिन 100 डेज प्लान में दो सौ प्रकरणों का निस्तारण कर दिया जाएगा। धीरे-धीरे सभी प्रकरण निबटाए जाएंगे।
-एफ.आर.सोनी, अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन), माध्यमिक शिक्षा





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