बीकानेर.
इस मौसम का मिजाज कहें या बिगड़े मौसम का परिणाम। सर्दी में बारिश का आना लोगों को अखरा भी तो कइयों की मौज भी हुई। बात बच्चों से शुरू हुई तो गार्जियन्स के चेहरों पर चिंता की रेखाएं थी तो गृहिणियों के सामने रजाई में दुबके परिवारजनों को पकौड़े खाने की फरमाइश थी। किसान खुश हुए बोले और बारिश चाहिए। डिस्पेंसरी में ड्यूटी दे रहे डॉक्टर बुदबुदाए-है भगवान! अब और मरीज नहीं चाहिए।
बुधवार को हुई बारिश ने लोगों की दिनचर्या ही बदल दी। जो समय पर निकल गए वे कार्यालय पहुंच गए जिन्होंने देर की वे बारिश के कारण नहीं निकल सके। हल्की ही सही लेकि न बारिश के कारण उन्हें छुट्टी पर ही रहना पड़ा। सुबह जब लोगों की आंख खुली तो आंगन व बाहर बारिश का नजारा मिला। रात में भी बारिश हुई। सुबह छह बजे तक हल्की बूंदाबांदी होती रही।
बूंदाबांदी रुकते ही लोग कार्यालय व बच्चे स्कू ल जाने की तैयारी करने लगे। दस बजे फिर बूंदाबांदी शुरू हो गई जो साढ़े दस बजे तक चली। इस कारण जो दस बजे से पहले घर से निकल गए उन्हें रास्ते में रुकना पड़ा लेकिन जो देर से कार्यालय पहुंचना चाहते थे वे घर से ही नहीं निकल सके। साढ़े दस बजे बूंदाबांदी रुकी और लोगों ने जैसे ही कार्यालय जाने की तैयारी की तो 11 बजे फिर बूंदाबांदी शुरू हो गई।
इस कारण कई लोगों ने छुट्टी ले ली और रैनी-डे का आनंद लिया। मौसम को देखते हुए कार्यालय में भी उपस्थिति कम मिली। जो स्कूल दस बजे से लगते हैं वहां भी बच्चे कम पहुंचे। लोगों ने मौसम का खूाब आनंद लिया। कार्यालय से लेकर घरों में भी चाय की चुस्कियों का दौर चलता रहा।
कार्यालय में लोगों ने कचौड़ी-पकौड़ी का आनंद लिया तो घरों में भी किचन के मीन बदल गए। बाजारों में भी लोग गर्मागरम कचौड़ी का आनंद लेते नजर आए। इस कारण दुकानों में खूब बिक्री हुई। चाय की थड़ियों पर भी लोगों का जमघट मिला।
स्वास्थ्य का रखें ध्यान
पल-पल रंग बदलता मौसम सुहाना भले ही लगे लेकिन डॉक्टरों की राय स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की है। धूप-छांव के माहौल और भली लगने वाली ठंडी हवा बच्चों और बूढ़ों की वनिस्पत जवानों को जल्दी चपेट में लेती है। यही कारण है कि मौसम में आ रहे बदलाव ने सर्दी-जुकाम के रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी कर दी है। डिस्पेंसरियों में आने वाले रोगियों में 70-80 फीसदी सर्दी-जुकाम से पीड़ित ही पहुंच रहे हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि सर्दी के कारण श्वास नलियों में शिथिलन आ जाता है ऐसे में अस्थमा रोगियों की अधिक परेशानी उठानी पड़ती है। वहीं हार्ट पेशेंट के लिए भी ऐसी सर्दी घातक साबित होती है। इस समय खून का बहाव कम हो जाता है जिससे हृदयघात की समस्या बढ़ जाती है।
डा. राहुल हर्ष बताते हैं कि संक्रमण के कारण सर्दी-जुकाम के रोगियों की संख्या में इजाफा हो है। ऐसे समय में बुजुर्गो का सर्दी से बचाव करने के साथ-साथ उन्हें संक्रमित रोगी से दूर भी रखा जाना बेहतर होता है। सर्दी से बचने के लिए बच्चों को गर्म कपड़ों में ही रखा जाना चाहिए।
चना, गेहूं व जौ को फायदा
पश्चिमी विक्षोभ ने पश्चिमी राजस्थान के किसानों की तकदीर बदल दी। भले ही हल्की सही लेकिन बूंदाबांदी ने रबी की उन फसलों को जीवनदान दे दिया जो पानी की कमी से सूख रही थी। सूनी पड़ी नहरों के कारण किसानों को भगवान से ही आसरा था। सोमवार से छाए बादलों ने मंगलवार को हल्की बूंदाबांदी। बुधवार दोपहर तक भी जो जारी रही। अब शहरी इलाके में एक मिलीमीटर ही बारिश दर्ज की गई लेकिन ग्रामीण इलाकों में अच्छी बारिश की खबर है।
लूणकरणसर, खाजूवाला में तो दो दिन पहले ही हल्की बारिश हो चुकी। उसके बाद बुधवार को भी बारिश होने से किसानों के चेहरे खिल उठे। वैसे भी मावठ का पानी सिंचाई के पानी से कहीं अधिक फायदेमंद माना जाता है। बादलों के मिजाज को देख अभी मावठ की संभावना लगाई जा रही है।
कृषि अधिकारियों का कहना है कि यदि 20 मिलीमीटर तक बारिश हो जाए तो किसानों को नहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। फरवरी व मार्च में पानी की जरूरत पड़ेगी। बूंदाबांदी से सबसे अधिक फायदा गेहूं, जौ व चना को हुआ है। सरसों के लिए बारिश मुफीद मानी जा रही है।
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ.होशियारसिंह का कहना है कि इस बारिश से फसलों को जीवनदान मिला है लेकिन अभी और बारिश हो तब फसलों को पूरा लाभ मिलेगा। उनका कहना है कि बारिश से फसल के फूल व दाना स्वस्थ होते हैं।