जोधपुर. नगर विकास न्यास ने बाड़मेर की ओर जाने वाले नेशनल हाईवे की सड़क सीमा में 9 किमी तक जिन निर्माणों पर बुलडोजर चलाया है, उस दायरे में आने वाली भूमि की कीमत ही सत्तर करोड़ रुपए से ज्यादा बैठती हैं। निर्मित इमारत और भवनों को हुए नुकसान का आकलन अलग है।
हाईकोर्ट के आदेशों की पालना के तहत न्यास ने दो रोज पूर्व अतिक्रमण अभियान शुरू करते हुए खेमे का कुआ, पाल बालाजी मंदिर के आस-पास, पाल गांव बाइपास, दल्ले खां चक्की इलाके के साथ 12 वी रोड से जुड़े क्षेत्र से रहवासीय, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के साथ सरकारी एवं गैर सरकारी कार्यालयों के लिए बनाई गई इमारतों का उतना हिस्सा ध्वस्त कर दिया था, जो सड़क के केंद्र बिंदु से 75 फीट के दायरे में आ रहा था।
बाजार मूल्य के हिसाब से इस मार्ग पर शहर के निकट दूरी पर 50 हजार रुपए प्रति वर्ग गज का मूल्य है तो दूरी पर 15 हजार रुपए प्रति वर्ग गज के भाव हैं। यदि औसत 20 हजार रुपए प्रति वर्ग गज जमीन का मूल्य माना जाए तो 70 करोड़ की जमीन से निर्माण ध्वस्त किए गए हैं।
क्या है बाजार भाव
जोधपुर में आसमान छू रहे जमीनों के भाव को देखें तो बाड़मेर राजमार्ग पर आने वाले क्षेत्र में 12 वी रोड के आसपास जहां 50 हजार प्रति वर्ग गज जमीन का मूल्य है तो शहर से दूर पाल बाइपास पर 15 हजार प्रति वर्गगज जमीन का मूल्य है। इसी तरह खेमा का कुआ क्षेत्र में 35 हजार रुपए वर्ग गज है जबकि पाल बालाजी के निकट 20 हजार रुपए वर्ग गज जमीन का मूल्य है।
अतिक्रमी बता कर मालिकों को उजाड़ा: देवड़ा
राजस्थान आवासन मंडल के पूर्व चेयरमैन मानसिंह देवड़ा ने कहा कि पाल रोड पर चल रहा यूआईटी का अभियान गैर कानूनी ही नहीं, हाईकोर्ट को भी भ्रमित करने वाला है। हाईकोर्ट के आदेश की आड़ में पट्टाधारक मकान मालिकों को अतिक्रमी बता कर उजाड़ा है। नगर विकास न्यास की स्कीम में लिए भूखंडों पर न्यास ने ही नक्शे स्वीकृत किए और कॉमर्शियल चार्जेज के रूप में भी करोड़ों रुपए लिए थे, अब वही न्यास उन्हीं मकानों को तोड़ रहा है।
बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में देवड़ा ने कहा कि शास्त्रीनगर यूआईटी की एप्रूव्ड स्कीम एरिया है जिसे टाउन प्लानिंग विभाग ने स्वीकृत किया तथा सभी निर्माण पट्टासुदा प्लाटों पर भवन निर्माण की अनुमति के अनुसार किए गए हैं, ये अतिक्रमण नहीं है। इस स्कीम एरिया में पाल रोड को 150 फीट दर्शाया है। सड़क के दोनों ओर बिल्डिंग लाइन 150 फीट से ज्यादा है फिर भी न्यास ने उन्हें अतिक्रमी बता कर तानाशाही रवैया अपनाते हुए तोड़फोड़ की है जो गैर कानूनी है।
बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए तथा मुआवजा भुगतान किए तोड़फोड़ करना ट्रेसपास, डकैती और लूटपाट की श्रेणी में आता है। हाईकोर्ट ने अपने आदेशों में साफ कहा है कि पाल रोड पर अतिक्रमण हटाए जाएं, यह नहीं कहा कि पट्टाधारकों को हटा दिया जाए।
आदेश यह भी नहीं है कि बारहवीं रोड से ही पाल रोड मानी जाएगी। मास्टर प्लान के अनुरूप स्थिति बनाने के निर्देशों की भी पालना नहीं हो रही है। आदेश में 200 फीट लिखा है तो ये 75 फीट ही क्यों हटा रहे हैं। विकास के लिए सड़कें चौड़ी होती है, मगर उसके लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए मनमर्जी से तोड़फोड़ नहीं करनी चाहिए।
रोड व डिवाइडर ही सही नहीं
पाल रोड पर सैकड़ों मकान तोड़ने के साथ ही मानसिंह देवड़ा के मकान की चारदीवारी गिराने से कांग्रेसी नेता इस अभियान के खिलाफ लामबंद हो गए। पूर्व विधायक जुगल काबरा, भंवर बलाई, महापौर ओमकुमारी गहलोत, उप महापौर अब्दुल गनी फौजदार, पूर्व न्यास अध्यक्ष राजेंद्र सोलंकी, यूथ कांग्रेस अध्यक्ष सत्यनारायण भट्ट, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गोविंद श्रीमाली, रमेश बोराणा, सुरेश व्यास आदि ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस मेंं इस अभियान को गलत बताया।
उन्होंने कहा कि कई जगह ऐसी है जहां सड़क के दूसरी ओर 80 फीट से ज्यादा जगह है। बिल्डिंग लाइन के मध्य बिंदू से सड़क की चौड़ाई 150 फीट नापनी चाहिए, न कि डिवाइडर से। डिवाइडर और सड़क एक तरफ ज्यादा बनी होने का नुकसान सैकड़ों लोगों को उठाना पड़ा है। इस कार्रवाई के खिलाफ अब वे कोर्ट की शरण लेंगे।