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साहित्य, कला और आतंक: बहस

आतंकवाद अब जमीन के किसी एक टुकड़े की समस्या नहीं है। पश्चिमी देश भी इससे रूबरू हैं। वहां हुई आतंकी घटनाओं के बाद कई नॉवेल लिखे गए। इस सदी के शुरू में मार्गरेट एटवुड द्वारा लिखे नॉवेल ‘द ब्लाइंड’ को बुकर पुरस्कार मिल चुका है।

इसी तरह बैअ ईस्टन एलिस का उपन्यास ‘ग्लैमोरैना’ सौंदर्य से शुरू होकर आतंक पर खत्म होता है। रसेल वैक्स का नॉवेल ‘क्लाउडस्प्लिटर’ को तो आधुनिक अमेरिका की गाथा के रूप में स्वीकार किया गया है।

बीती सदी के अंत में प्रकाशित स्लापेंका ड्रेक्यूलिक का उपन्यास ‘एस इफ आई एम नॉट देअर’ विश्व साहित्य की धरोहर माना जाता है। आतंकवाद को केन्द्रीय विषय बनाकर रची अन्य रचनाएं हैं - ‘कल्चर ऑफ टेररिज्म’, ‘द टेरर ऑफ गॉड’ तथा ‘टेरर एंड द सब्लाइम इन आर्ट’।





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