जोधपुर. मंगला फील्ड में पूर्व में दर्शाए गए भंडार से 25 प्रतिशत अधिक तेल भंडार मौजूद हैं। केयर्न इंडिया ने अपने ताजा आकलन में पता लगाया है कि केवल मंगला क्षेत्र से ही रोजाना सवा लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन हो सकेगा।
रिपोर्ट कंपनी के मुख्य कार्यकारी राहुल धीर ने हाइड्रोकार्बन महानिदेशक को प्रेषित की है। इसके अनुसार उत्पादन शुरू होने पर यहां से प्रतिदिन सवा लाख बैरल और भाग्यम व ऐश्वर्या को मिलाकर रोजाना पौने दो लाख बैरल तेल का उत्पादन होगा।
बाड़मेर बेसिन में उत्पादन शुरूहोने पर यहां से मिलने वाला तेल देश के कुल उत्पादन का करीब एक चौथाई हिस्सा होगा। पहले मंगला से रोजाना करीब एक लाख, ऐश्वर्या में 10 से 20 हजार व भाग्यम 20 से 40 हजार बैरल तेल उत्पादन होने की बात कही गई थी।
कंपनी ने राजस्थान के तेल क्षेत्रों में अधिकतम तेल उत्पादन के लिए उन्नत तकनीक का परीक्षण किया। इस दौरान हुए प्रयोगशाला अध्ययन में विभिन्न रसायनों जैसे पोलीमर, अल्कलाइन, सल्फक्टेट आदि के उपयोग से तेल उत्पादन बढ़ने की संभावनाओं का पता लगाया गया।
चार साल पहले हुई खोज
केयर्न इंडिया ने बाड़मेर बेसिन में तेल-गैस की खोज वर्ष 2002 में शुरू की थी। 2004 में मंगला फील्ड की खोज की गई। राजस्थान का आर जे- ओएन-90/1 मुख्य उत्पादन क्षेत्र में मंगला, ऐश्वर्या, सरस्वती व रागेश्वरी 1858 वर्ग किमी में फैला हुआ है।
24.9 फीसदी तेल की वृद्धि होगी
भारत में रोजाना 26.50 लाख बैरल तेल की मांग है। इसकी पूर्ति के लिए बीस लाख बैरल तेल विदेशों से आयात किया जाता है, साढ़े छह लाख बैरल तेल का घरेलू उत्पादन होता है। बाड़मेर बेसिन में शीर्ष उत्पादन शुरूहोने पर देश के कुल तेल उत्पादन में करीब 24.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो जाएगी।