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गिट्टी में मिट्टी

बाड़मेर. sand मैं मदन बारूपाल फोटोग्राफर कालू माली के साथ जसाई रेलवे स्टेशन पर खड़ा हूं। दिन के डेढ़ बजे हैं। यहां खड़ी डिविजनल मेटेरियल ट्रेन में जेसीबी से गिट्टी का लदान चल रहा है। पर्याप्त गिट्टी नहीं होने से ट्रैक के समीप पड़ी रेत व मिट्टी भी वैगनों में भरी जा रही है।

कुछ रेलवे कर्मचारी इसे लेकर एतराज जताते हैं, लेकिन काम चलता रहता है। इस बीच हमारे पत्रकार होने का पता लगते ही लदान कर्मियों ने काम रोक दिया। ठेकेदार के आदमियों के कहने पर जेसीबी चालक व श्रमिक एक तरफ खड़े हो गए।

हाईलेवल का मामला है
गिट्टी परिवहन में गड़बड़झाले का पर्दाफाश हो जाने की आशंका के चलते ठेकेदार के आदमियों ने हमें यह समझाने की कोशिश कि साहब काम चल रहा है, जल्दी ही पूरा लदान करके ट्रेन रवाना कर दी जाएगी। यह कहने पर कि गिट्टी तो पूरी नहीं है, उनका जवाब था कि ट्रकों से लाई जा रही है। इस बीच एक व्यक्ति साइड में जाकर ट्रकचालक को मोबाइल से मैसेज कर देता है कि यहां ट्रक नहीं लाए।

इसके बाद तो हर कोई सफाई देता नजर आया कि साहब यह हमारे स्तर का मामला नहीं है। हाईलेवल की बात है। आप तो बस उनसे ही बात करें। इस दौरान जोधपुर से चीफ कंट्रोलर का जसाई रेलवे स्टेशन मास्टर के पास संदेश आया कि काम रुकवा दिया जाए।

क्या होना चाहिए था
डीएमटी अर्थात डिविजनल मेटेरियल ट्रेन में गिट्टी परिवहन के लिए नियमानुसार मेजरमेंट के बाद ही लदान होता है। इसके लिए संबंधित ठेकेदार को पहले गिट्टी लाकर चौकोर थप्पे बनाने होते हैं। इसके बाद इंजीनियरों की टीम गिट्टी की गुणवत्ता का परीक्षण करती है। उपयुक्त पाए जाने पर मांग के अनुरूप मेजरमेंट करके मेटेरियल ट्रेन को ऑर्डर दिया जाता है। जसाई रेलवे स्टेशन से कुचामनसिटी के लिए गिट्टी लदान में इन सब बातों को नजरदांज किया गया।

क्यों होता है गिट्टी का इस्तेमाल
गिट्टी का इस्तेमाल टैक को मजबूती देने के लिए होता है। इस मजबूती पर ही ट्रेन की स्पीड निर्भर करती है।

24 वैगन भरने थे, 9 भरे
यह गड़बड़झाला कितने बड़े स्तर पर हो रहा था, इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जसाई रेलवे स्टेशन पर खड़ी डीएमटी के 24 वैगन गिट्टी से भरने थे, लेकिन 9 वैगन पूरे व 5 आधे भर पाए। इससे पूर्व 65 वैगन गिट्टी दो चरणों में डीएमटी से जा चुकी है।

पोल खुली तो गिट्टी-मिट्टी मिक्चर
अधिकारियों ने कथित रूप से मिलीभगत कर मौके पर डिमांड के अनुसार पर्याप्त गिट्टी बता दी। इसी के आधार पर मेटेरियल ट्रेन को बुला लिया गया, जबकि मौके पर पर्याप्त मात्रा में गिट्टी उपलब्ध ही नहीं थी। पोल खुलती देखकर गिट्टी के साथ रेत डाल उसकी मात्रा बढ़ाने की कोशिश की गई।

इस बात की भनक पड़ने पर रेलकर्मियों ने एतराज जताया तो बाहर से गिट्टी के ट्रक मंगवाए गए। नियमानुसार मेटेरियल ट्रेन में इंजीनियरों के बिना मेजरमेंट के सीधे ट्रकों से लोडिंग नहीं हो सकती।

>> चौबीस वैगन के लिए गिट्टी की जरूरत है, जबकि मौके पर पर्याप्त गिट्टी नहीं है। नियमानुसार मेजरमेंट के बाद ही गिट्टी का लदान होता है। उच्च स्तर से निर्देश मिलने पर फिलहाल लदान का कार्य रुकवा दिया गया है।
गंगासिंह, सेक्शन इंजीनियर, उत्तर-पश्चिम रेलवे, बाड़मेर

>> चीफ कंट्रोलर जोधपुर से काम रुकवा देने का मैसेज मिला था। इस पर गिट्टी लदान का कार्य रुकवा दिया गया है।
संजयकुमार, रेलवे स्टेशन मास्टर, जसाई

एईएन, ठेकेदार प्रथम दृष्टया दोषी
रेलवे विजीलेंस की टीम ने बुधवार रात को ही जसाई स्टेशन पहुंच कर जांच की। टीम में शामिल विजीलेंस इंस्पेक्टर अजय कुमार श्रीवास्तव व के. के. कंदोई ने इसमें अनियमितताएं परई।

इनमें बगैर मेजरमेंट गिट्टी भरने, बैलेंस बुक में दर्ज मात्रा से गिट्टी काफी कम मिलने व बाद में ट्रकों में गिट्टी लाकर वैगन में भरने का प्रयास करने की बात सामने आई। विजीलेंस विंग के प्रदीप चौधरी ने बताया कि इस मामले में प्रथम दृष्टया सहायक अभियंता, ठेकेदार व पीडब्ल्यूआई को दोषी पाया गया है। इस संबंध में गुरुवार को भी जांच जारी रहेगी।





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