कोटा. केन्द्र सरकार ने ऑटो एलपीजी गैस की कीमतों में गुपचुप बढ़ोतरी कर दी है। इसका असर रसोई गैस पर पड़ रहा है। ऑटो एलपीजी गैस से वाहन चलाने वाले अब रसोई गैस से वाहन चलाने लगे हैं। इससे रसोई गैस की किल्लत और बढ़ गई है।
केन्द्र सरकार ने पिछले तीन माह में ऑटो एलपीजी गैस की कीमतों में प्रति लीटर 8.33 रुपए की वृद्वि की है। इससे ऑटो एलपीजी गैस की दर अब बढ़कर 35.53 रुपए तक जा पहुंची है, जबकि रसोई गैस करीब 22 रुपए लीटर पड़ती है।
हालांकि बहुत से उपभोक्ताओं का मानना है कि वाहनों में वे ऑटो एलपीजी गैस का उपयोग करना चाहते हैं लेकिन गैस की कीमतों में बढ़ोतरी उन्हें ऐसा करने से रोक रही है। वाहन मालिकों का यह भी कहना है कि ऑटो एलपीजी गैस के मुकाबले रसोई गैस से अधिक एवरेज मिलता है। एक वाहन औसत रूप से एलपीजी गैस से जहां 12 किलोमीटर प्रति लीटर चलता है, वहीं रसोई गैस से यह 17 किलोमीटर तक चलता है।
गैस मापने की व्यवस्था नहीं
ऑटो एलपीजी गैस पम्प पर पूरी गैस मिलती है या नहीं, इसकी जांच की व्यवस्था फिलहाल नहीं है। पम्प के पास माप-तोल विभाग का प्रमाणपत्र होना चाहिए। यह नियम पेट्रोल पम्प पर तो लागू है लेकिन ऑटो एलपीजी गैस पम्प के लिए नहीं।
>> गैस किट का उपयोग करने पर गाड़ी के एवरेज में कई बार अंतर आता है। लंबी दूरी पर जाने पर गाड़ी का कभी 10 कभी 12 किमी प्रति ली. तक का एवरेज निकलता है।
—सुरेश गुप्ता, तलवंडी
>> ऑटो एलपीजी गैस पम्प का सारा सिस्टम कम्प्यूटराइज्ड है। इसमें कहीं भी शार्ट डिलीवरी की संभावना नहीं है। कई बार स्वयं उपभोक्ता के किट में ही गड़बड़ होती है।
—घनश्याम शर्मा
मैसर्स माडर्न ऑटो ट्रेडर्स
>> आटो एलपीजी पम्प को देखने का अधिकार विधिक माप विभाग के दायरे में नहीं है। यह केन्द्र के अधिकार क्षेत्र में है और वह कानून में संशोधन करके ऐसा कर सकती है।
—पीएन नंदवाना प्रभारी निरीक्षक, विधिक माप विज्ञान
>> ऑटो एलपीजी गैस पम्प पर माप-तोल जांच करने का काम विभाग के पास नहीं है। वर्तमान में यह काम व्यवस्थित तरीके से नहीं हो पा रहा है क्योंकि गैस को जांचने का उपकरण, मास्टर मीटर करीब 2.50 लाख रुपए का होता है, जो अभी गैस कंपनियों के पास ही है।
—डीएल मीणा डीएसओ
गत छह माह की दरें
जनवरी 08 35.53 रुपए
दिसंबर 07 31.89 रुपए
नवंबर 07 29.24 रुपए
अक्टूबर 07 27.26 रुपए
सितंबर 07 27.85 रुपए
अगस्त 07 27.48 रुपए
एजेंसी के खिलाफ जांच के आदेश
निजी गैस कंपनी द्वारा अनधिकृत लोगों को गैस सिलेण्डर देने पर त्वरित कार्रवाई करते हुए जिला रसद अधिकारी (डीएसओ) ने जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही एजेंसी के खिलाफ आईओसी को पत्र लिखा है।
डीएसओ ने शहर में दैनिक गैस वितरण की व्यवस्था की समीक्षा के दौरान पाया कि मैसर्स सुविधा गैस एजेंसी द्वारा दिसंबर-07 में 57 सिलेण्डर ऐसे लोगों को दे दिए गए जो एजेंसी के उपभोक्ता तक नहीं थे।
डीएसओ ने एजेंसी के विरूद्घ कार्रवाई करने के लिए आईओसी लि. राजस्थान के चीफ एरिया मैेनेजर (एलपीजी) को लिखा है। इसके अलावा डीएसओ ने दो सदस्यीय टीम गठित कर आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के तहत कार्रवाई के लिए गैस एजेंसी के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं।
अधिकारी सुनेंगे शिकायतें
जनवरी में बीपी एवं आईओसी के विक्रय अधिकारी कोटा में रहेंगे। आईओसी के उपप्रबंधक (विक्रय) विमल कुमार 16 जनवरी को विज्ञान नगर स्थित दिनेश गैस एजेंसी पर दोपहर दो से पांच बजे, बीपी के उपप्रबंधक (विक्रय) राजेश चिपलांगकर 21 जनवरी को सुलभ एवं 22 जनवरी को अरविंद गैस एजेंसी पर दोपहर तीन से पांच बजे तक समस्याएं सुनेंगे।