जयपुर. न आवंटन-पत्र, न मालिकाना हक और न ही जमीन। रिंग रोड क्षेत्र में आ रहे किसानों ने उन आरक्षण-पत्रों को ही बेच दिया, जिनमें जेडीए ने उन्हें मुआवजे में जमीन के बदले जमीन देने का भरोसा दिलाया था। इन पत्रों को खरीदने वालों को सीधे पट्टे जारी करने संबंधी जेडीए के फैसले पर स्वायत्त शासन राज्यमंत्री ने अपनी मुहर लगाने से इनकार कर दिया है। मामला अब मुख्यमंत्री तक पहुंच गया है।
जेडीए ने कुछ दिन पहले ही यह फैसला किया था कि सेज की तर्ज पर रिंग रोड क्षेत्र में भी उन लोगों को सीधे पट्टे दे दिए जाएं, जिन्होंने किसानों से आरक्षण-पत्र खरीदे। जेडीए का मानना था कि इससे 25 रुपए प्रति वर्गमीटर की दर से हस्तांतरण शुल्क मिलेगा। यह सोचकर जेडीए ने बैठक की कार्यवाही का अनुमोदन कराने के लिए फाइल स्वायत्त शासन एवं नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव परविंदर पंवार के माध्यम से स्वायत्त शासन राज्यमंत्री सुरेंद्र गोयल को भेजी थी।
गोयल ने यह कहते हुए कि मीटिंग में मैं तो था ही नहीं, इस कार्यवाही का अनुमोदन क्यों करूं, फाइल मुख्यमंत्री को भेज दी। उस पर लिखा कि पीछे की कार्यवाही को देखते हुए जेडीए के फैसले का अनुमोदन करें। बताया जाता है कि नए राज्यमंत्री जेडीए और महकमे की पुरानी छवि को देखते हुए फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद उनके पास गई ज्यादातर फाइल अभी तक लौटकर नहीं आई हैं।
सरकार से मिले थे निर्देश: जेडीए आयुक्त डीबी गुप्ता के अनुसार टाउनशिप डवलपर्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (टोडार) ने पिछले दिनों रजिस्ट्री से आरक्षण पत्र खरीदने वालों को सीधे पट्टे जारी करने का प्रस्ताव रखा था। राज्य सरकार से भी इस तरह के निर्देश मिले थे कि इन लोगों को सीधे पट्टे जारी किए जा सकते हैं।
सेज में भी इस तरह के आरक्षण पत्र बिके थे और उन्हें भी पट्टे दिए गए थे। इसलिए बैठक में यह फैसला किया गया। आरक्षण-पत्र बिकने में कानूनी-बाधा नहीं: जेडीए आयुक्त गुप्ता के अनुसार आरक्षण-पत्र बिकने में किसी तरह की कानूनी बाधा नहीं है। आरक्षण-पत्र की शर्तो में ही यह लिखा है कि इसे खरीदा-बेचा जा सकता है।
मामला क्या
रिंग रोड में मुआवजे के आरक्षण-पत्र खरीदने वालों को सीधे पट्टे जारी करना।
मंत्री बोले
बैठक में मौजूद नहीं था, तो क्यों करूं कार्यवाही का अनुमोदन? फाइल मुख्यमंत्री को भेजी।