जयपुर. प्रदेश में इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट या आईटी की तरह 25 हजार नौकरियों वाला ट्रांसलेशन (अनुवाद) सेक्टर तैयार है। नेशनल नॉलेज कमीशन के शिक्षा संबंधी ब्लू पिंट्र में बताया गया है कि देश में 250 करोड़ रुपए की लागत से जल्द ही नेशनल ट्रांसलेशन मिशन बनेगा। इस सेक्टर को देश में अगले पांच साल के दौरान 2.5 लाख युवाओं की जरूरत होगी। इसमें राजस्थान के हिस्से का अनुमान 10 प्रतिशत है। साहित्य, शिक्षा, विज्ञान, तकनीकी और व्यापार जैसे क्षेत्रों में अनुवाद को फोकस बिंदु रखा गया है।
अनुवादकों की जरूरत क्यों? : आईआईटी, आईआईएम, एमबीबीएस, एमएस, गणित, भौतिकी, रसायन, संगीत, कला, आयुर्वेद आदि के लिए पुस्तकों का अनुवाद कराने के लिए बड़ी संख्या में सुशिक्षित युवाओं की जरूरत होगी। अगर कोई आईआईएम या आईआईटी की पुस्तक तैयार करेगा तो उसे पगार भी उसी स्तर की मिलेगी।
कृषि, प्रबंधन, आर्थिक क्षेत्र, चिकित्सा विज्ञान आदि में हमें चीनी पुस्तकों के अनुवाद की जरूरत अपने लिए होगी तो आयुर्वेद के संस्कृत ग्रंथों का अनुवाद करके उनकी रॉयल्टी अर्जित करने के लिए हमें संस्कृत से अंग्रेजी अनुवाद करने वालों की जरूरत होगी। गूगल जैसी वेबसाइटों और विकीपीडिया जैसे ऑनलाइन एन्साइक्लोपीडिया ने स्थानीय जानकारियों वाले नॉलेज बैंक तैयार करना शुरू कर दिया।
नेशनल नॉलेज कमीशन के चेयरमैन सैम पित्रोदा का कहना है कि इसके लिए डॉ. जयति घोष के नेतृत्व में एक समूह काम शुरू कर चुका है। यह समूह अनुवाद, प्रकाशन और सृजन संबंधी क्रियाकलापों में अनुवादकों की जरूरतों को पूरा करने के तरीके तलाशन में जुटा है। अनुवाद के इस सेक्टर की जरूरत पूरी करने के लिए हर साल नेशनल कान्फ्रेंस की जाएंगी। इसके तहत अनुवादकों के लिए विशेष पुस्तकें तैयार करवाई जाएंगी। उन्हें फेलोशिप दी जाएगी।
अनुवाद के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने के लिए पुरस्कार भी दिए जाएंगे। नॉलेज कमीशन के चेयरमैन का कहना है कि अनुवाद के बाद भारतीय भाषाओं के साहित्यकारों के लिए भारी रॉयल्टी मिलने की संभावना है। मूल ग्रंथ 125 में, अंग्रेजी में 1100 रुपए! बाजार में संस्कृत में मूल मनुस्मृति 125 रुपए में उपलब्ध है, लेकिन ऑक्सफोर्ड ने हाल ही ‘मनु’ज कोड ऑफ लॉ’ प्रकाशित की है, जिसकी कीमत 1100 रुपए है। यह करिश्मा अनुवादक की विशेषज्ञता ही माना गया है।
विदेशों में राजस्थानी साहित्य की मांग
नेशनल नॉलेज कमीशन के अध्ययन में यह बात सामने आई है कि विदेशों में अन्य भारतीय भाषाओं की तरह राजस्थानी साहित्य की जबर्दस्त मांग है। इसको विदेशों में लोकप्रिय बनाने का काम अनुवाद के जरिए ही हो सकता है। इसी तरह विदेशी भाषाओं के लोकप्रिय प्रकाशनों को भारतीय भाषाओं में लाने की योजना भी तैयार है। नेशनल वेब पोर्टल बनाना: दुनिया के किसी भी हिस्से में बैठा व्यक्ति किसी भी राजस्थानी या अन्य भारतीय भाषा में ग्रंथ, रचना, रिपोर्ट आदि का अनुवाद अपनी मनपसंद भाषा में लेना चाहे तो उसे यह सुविधा हाथोंहाथ मिले। इसके लिए एक नेशनल वेबपोर्टल तैयार किया जा रहा है। यह काम भी नॉलेज कमीशन कर रहा है।
अनुवाद बनेगा उद्योग
पित्रोदा का कहना है कि एनएनसी ने अनुवाद को उद्योग बनाने की योजना तैयार कर ली है। बेहतरीन अनुवाद के लिए सूचना बैंक बनेगा। अनूदित साहित्य को प्रोत्साहन दिया जाएगा। टांसलेशन टूल्स तैयार होंगे। अनुवादकों को उच्च दक्षता वाला प्रशिक्षण दिया जाएगा। किसी भी भाषा के किसी भी ग्रंथ, साहित्य या विधा का हर समय अनुवाद हाथोहाथ तैयार मिले, ऐसी व्यवस्था की जाएगी।
नौकरियां देगा कौन?
अनुवाद के लिए नौकरियां विभिन्न कंपनियां, सरकारी विभाग, एनजीओ और संचार क्रांति से जुड़े उपक्रम देंगे। उदाहरण के तौर पर अगर किसी दवा निर्माता कंपनी को आयुर्वेद के किसी पौधे पर अनुसंधान करना है तो उसे न केवल संस्कृत और अंग्रेजी के जानकार की जरूरत होगी, बल्कि उस व्यक्ति को आयुर्वेद का ज्ञाता भी होना जरूरी होगा।