जयपुर.
परंपरा की डोर में बंधकर पूरे जयपुर की निगाहे आज अरमानों के आसमां पर टिकी रहेंगी। इस बार पहली दफा मकर संक्रांति 15 जनवरी को है, लेकिन छुट्टी 14 को होने की वजह से पतंगबाजी सोमवार को ही अपने चरम पर पहुंचेगी। पूरा शहर छत पर होगा और सड़कों पर लगा रहेगा जनता कफ्यरू..
बाजारों में देर रात तक रौनक
शहर के हांडीपुरा, हल्दियों का रास्ता, अजमेरी गेट, चांदपोल बाजार, पुरानी बस्ती और संजय बाजार में युवकों की टोलियां देर रात तक पतंगें खरीदती दिखाई दी। इस बार पतंगबाजों के लिए मकर संक्रांति तीन दिन की रहेगी। 13 जनवरी को रविवार होने की वजह से शहरभर में पतंगे उड़ाई गईं। 14 को छुट्टी होने के कारण शहर छतों पर जमा रहेगा और 15 जनवरी को तो मकर संक्रांति है ही।
हवा भी देगी साथ
सोमवार को जयपुर और राज्य के ज्यादातर हिस्सों में 10-12 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा चलेगी। यह हवा की सामान्य रफ्तार है। इसे पतंगबाजी के अनुकूल माना जाता है।
पतंगबाजी की डिक्शनरी
हल्के का पेच--ऊपर से दबाकर पेच काटना।
डबल देना--शह के दौरान सामने वाले की डोर से हटते हुए खींच मारना।
कूद लगाना--पेच के समय पतंग को तेजी से नीचे की ओर लाना।
खेंच मारना--पतंग को तेजी से खींचना।
लच्छा मारना--पतंग को तेजी से खींचकर उतनी ही तेजी से ढीली छोड़ना, खींच के पतंगबाज का अचूक हथियार है।
शह की चुटकी--शह के कारण तेजी के खेंच के साथ चुटकी देते हुए पीछे भागना।
तोड़मताड़ी--अपनी डोर से दूसरे के तंग फंसाकर पतंग खींचकर अपने घर ले आना।
पुण्यकाल 15 को
इस बार सूर्य 14 जनवरी को रात 12.09 बजे मकर राशि में प्रवेश करेगा। इसलिए पुण्यकाल 15 जनवरी को माना जाएगा। राजस्थान ज्योतिष परिषद के महासचिव डॉ. विनोद शास्त्री ने बताया कि पुण्यकाल मंगलवार शाम 4.09 बजे तक रहेगा। पुण्यकाल में दान करना श्रेष्ठ माना जाता है। इस बार संक्रांति लोगों को धन देने वाली होगी।