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Bilaspur Bilaspur बिलासपुर.
देश शीघ्र ही गणित के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी हो जाएगा। शासन की ओर से पर्याप्त सुविधा नहीं मिलने के बाद भारतीय गणितज्ञों ने महान कार्य किए हैं। नई पीढ़ी के गणितज्ञ प्रतिभाशाली और दूरदर्शी है। ये बातें गणित विशेषज्ञ व विक्रम यूनिवर्सिटी उज्जैन के प्रो. जीएस पांडेय ने कही। दैनिक भास्कर से हुई चर्चा में उन्होंने बताया कि भारत में गणित का प्रादुर्भाव ऋग्वेद काल से हुआ है। ऋग्वेदकाल से जिस पंचांग पद्घति का विकास हुआ है, वह आज भी चल रहा है।
शून्य और अनंत की परिकल्पनाएं स्पष्ट रूप से कठोपनिषद में दी गई है। पश्चिम के विद्वानों का ये कथन कि बीज गणित का विकास यूनानियों ने किया है, भ्रामक है। प्रो. पांडेय ने बताया कि वेदांग ज्योतिष में बीजगणित के अनेक उदाहरण हैं। वेदांग ज्योतिष की रचना 1500 ईसा पूर्व में हुई थी। गणित को अनिवार्य विषय किया जाना ठीक नहीं है, क्योंकि जिन्हें इस विषय के साथ आगे पढ़ने की इच्छा है, वे दसवीं के बाद पढ़ाई कर सकते हैं।
गणित से बच्चों को डर क्यों लगता है, सवाल पर उन्होंने इसके दो कारण बताए- पहला बचपन से ही इसमें रुचि न लेना और दूसरा इसका रुचिकर न होना। पहले गणित श्लोकों के माध्यम से पढ़ाई व रटवाई जाती थी, जिससे छात्र-छात्राओं में इस विषय को लेकर रुचि रहती थी और उन्हें इसे पढ़ने में आनंद आता था। इंटरनेशनल कांफ्रेंस में पहुंचे श्री पांडेय ने कहा कि गणित पर लोग यदि एक रुपए खर्च करते हैं, तो उन्हें इसका 16 गुना अधिक मिलता है। बगैर गणित के साइंस टेक्नालाजी का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता।