अजमेर. राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के विघटन मुद्दे पर सत्तारूढ़ भाजपा में मतभेद उभरकर सामने आए हैं। शिक्षा राज्यमंत्री ने विघटन की वकालत करते हुए इसे कार्य विभाजन बताकर दोनों बोर्ड के मुख्यालय अजमेर में रखने का दावा किया है। उधर, राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण अध्यक्ष दो बोर्ड की बात को गैरजरूरी मान रहे हैं। दूसरे विधायक भी विघटन के विरोध में आ गए हैं। उन्होंने मामले को सरकार और संगठन के सामने रखने की बात कही है।
राज्य सरकार दसवीं और बारहवीं कक्षा के अलग-अलग बोर्ड बनाने की तैयारी में है। इस बारे में आयोजित बैठक में शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी ने कार्य विभाजन के लिए इसे जरूरी बताया है। देवनानी ने रविवार को भास्कर को बताया कि कभी दो लाख विद्यार्थियों की परीक्षा का इंतजाम करने वाले बोर्ड के पास इस समय तकरीबन 14 लाख छात्र-छात्राएं हैं। कार्य के लगातार विस्तार होने पर उसे बांटने पर वह ज्यादा व्यवस्थित तरीके से किया जा सकता है।
ऐसे में बोर्ड के विघटन से फायदा ही होगा। उन्होंने कहा कि ऐसा सोचना सही नहीं है कि बंटने के बाद दूसरा बोर्ड अजमेर से बाहर चला जाएगा। बोर्ड स्वायत्तशासी संस्था है। इसमें किसी भी बड़े बदलाव के लिए पहले बोर्ड में प्रस्ताव पारित होगा। इसके बाद समिति बनेगी और रिपोर्ट ली जाएगी।
दूसरा बोर्ड गैरजरूरी
धरोहर संरक्षण प्राधिकरण के सदर ओंकारसिंह लखावत का कहना है कि बोर्ड का विघटन नहीं होना चाहिए। इससे फालतू के विवाद और दूसरी जटिलताएं पैदा होंगी। केकड़ी के विधायक गोपाल धोबी, ब्यावर के विधायक देवीशंकर भूतड़ा और विधायक अनिता भदेल भी विखंडन के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि वे इस मुद्दे को सरकार और संगठन के सामने उठाकर इसका विरोध करेंगे।
शिक्षा जैसे संवेदनशील मसले में राजनीति होनी ही नहीं चाहिए। सरकार इतना बड़ा फैसला करने जा रही है और शिक्षाविदों की राय तक नहीं ली जा रही। देश, प्रदेश और अजमेर में शिक्षाविदों की कमी थोड़े ही है। ऐसे मसलों में उनकी राय तो लें। बोर्ड का विघटन कतई नहीं किया जाना चाहिए। इसके भारी नुकसान होंगे। सबसे बड़ा नुकसान तो समन्वय का होगा।
अभी दोनों कक्षाओं का एक ही बोर्ड होने के कारण बहुत सी समस्याओं के समाधान एकसाथ हो जाते हैं। बाद में दोनों एक दूसरे का मुंह ताकेंगे। विद्यार्थियों की परेशानियों की इतनी ही चिंता है तो जिला स्तर पर बोर्ड के सब यूनिट खोल दें। बोर्ड का विघटन किसी समस्या का समाधान नहीं है। बोर्ड से देश भर में अजमेर की पहचान है।
-प्रो. केके शर्मा, विभागाध्यक्ष जूलॉजी, मदस विवि
बोर्ड का विखंडन किसी भी सूरत में अजमेर के हित में नहीं है। सामान्यत: माना जाता है कि विकेन्द्रीकरण से क्वालिटी में सुधार होता है, लेकिन बोर्ड के विखंडन से गिरावट आएगी। गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। सरकार बोर्ड के मौजूदा सिस्टम में ही सुधार करे। यदि कोई कमी हो तो उसे दूर करें।
-डॉ. रमेश पारीक , पूर्व शिक्षा उप निदेशक