बीकानेर. बीकानेर आने वाले सैलानियों के लिए रियासतकालीन इतिहास से रूबरू करवाने के लिए एक नया म्यूजियम तैयार हो रहा है। लालगढ़ पैलेस परिसर में बन रहे इस सादरूल म्यूजियम को सितंबर 2008 में सैलानियों और आमजन के लिए खोल दिया जाएगा। सादरूल म्यूजियम के बन जाने से बीकानेर में नए पर्यटन स्थल की तलाश का काम भी पूरा हो जाएगा। सैलानियों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए यहां पर नए पर्यटन स्थल की खोज की जा रही है। लालगढ़ पैलेस के ठीक सामने इस नए म्यूजियम के निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है और फिनिशंग होनी शेष है।
फिनिशिंग का कार्य मार्च के आखिर तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद इसे सूखने के लिए तीन-चार महीने खाली रखा जाएगा ताकि इसमें रखे जाने वाले पुरा महत्व के आइटमों को सीलन से नुकसान नहीं हो। महाराजा गंगासिंहजी ट्रस्ट के इस म्यूजियम को सितंबर में ओपन कर दिया जाएगा। फिलहाल पैलेस के ही एक ब्लॉक में यह म्यूजियम संचालित किया जा रहा है। इस म्यूजियम में बीकानेर रियासतकाल की प्रमुख घटनाओं के चित्र, अस्त्र-शस्त्र, राजपरिवार के लिए बनाई फिल्में सहित बड़ी संख्या में ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध है।
पैलेस में ही म्यूजियम संचालित होने के कारण पैलेसे में रुकने वाले सैलानियों को भी परेशानी आती थी, साथ ही उनकी प्राइवेसी पर भी प्रभाव पड़ता था। कोई भी व्यक्ति टिकट लेकर म्यूजियम में आ सकता था। इस स्थिति को देखते हुए पिं्रसेस राज्यश्री कुमारी ने म्यूजियम को अलग ही बनाने का निर्णय लिया। गत वर्ष इसका निर्माण भी शुरू हो गया। नए बनने वाले म्यूजियम पर लाखों रुपए व्यय होंगे। पहले चरण में ग्राउंड फ्लोर तैयार होगा और आवश्यकता पड़ने पर ऊपरी मंजिल भी बनाई जाएगी।
राष्ट्रस्तरीय स्वरूप
राज्यश्री कुमारी ने इस म्यूजियम को राष्ट्रस्तरीय रूप देने का निर्णय लिया है। उनकी मंशा है कि यह म्यूजियम न केवल सैलानियों के लिए आकर्षण का केन्द्र बने बल्कि देश-विदेश के शोध छात्रों के लिए भी उपयोग साबित हो। राजपरिवार के पास दुर्लभ पांडुलिपियां और दस्तावेज भी है। यह सभी इस म्यूजियम की शोभा बढ़ाएंगे। फिलहाल राजस्थान में जोधपुर के मेहरानगढ़ में बने म्यूजियम को श्रेष्ठ म्यूजियमों की श्रेणी में शामिल किया है। इसको देखते हुए राज्यश्रीकुमारी मेहरानगढ़ के म्यूजियम प्रभारी करणीसिंह जसोल को एडवाइजर नियुक्त किया है।
फिल्मों के लिए बनेगा हॉल
सादरूल म्यूजियम में रियासतकालीन फिल्में भी धरोहर के रूप में रखी हुई है। 22 से अधिक इन फिल्मों में बीकानेर राज्य के विकास, नए निर्माण आदि घटनाओं को कैद किया गया है। इतना ही नहीं राजा-महाराजाओं के शिकार की घटनाएं भी इन फिल्मों में है। राजपरिवार ने पारिवारिक कार्यक्रमों जैसे शादी-ब्याह की भी फिल्म बनाई थी। राजपरिवार के सदस्य आज इन फिल्मों को सीडी की शक्ल देने में जुटे हुए हैं। नए म्यूजियम में एक बडा़ हॉल भी होगा जहां पर सैलानियों को यह फिल्में दिखाने की योजना है।
राजशाही रेलवे कोच भी म्यूजियम में
पैलेस भवन के सामने रियासतकाल में राजपरिवार के काम आने वाला रेलवे कोच भी खड़ा किया था। धूप, बारिश और मिट्टी के कारण यह धरोहर भी खराब होने वाली थी। नए म्यूजियम के बीच में इस कोच को खड़ा किया जाएगा। बीकानेर के राजाओं ने बीकानेर से गजनेर के बीच रेल लाइन बिछवाई थी। ग्रीष्मकाल में राजपरिवार के सदस्य इसी कोच में गजनेर जाते थे।
कमरों की संख्या और बढ़ेगी
सैलानियों के फ्लो के कारण बीकानेर में होटलों में कमरों की संख्या भी कम पड़ने लगी है। म्यूजियम नए भवन में शिफ्ट होने के कारण लालगढ़ पैलेस में और कमरे उपलब्ध हो सकेंगे। पैलेस प्रबंधन ने इन कमरों को तैयार करने की भी योजना बना ली है। कमरे उपलब्ध होने के कारण टूर आपरेटरों को भी राहत मिलेगी।
प्रतिदिन 200 सैलानी
सादरूल म्यूजियम को देखने के लिए प्रतिदिन करीब 200 सैलानी लालगढ़ पैलेस पहुंचते हैं। नए भवन में शिफ्ट होने के बाद देशी सैलानियों का भी रुझान बढ़ने की उम्मीद है। गत वित्तीय वर्ष में बीकानेर में करीब पौने तीन लाख देशी-विदेशी सैलानी आए थे जिनमें से 30 फीसदी ने इस म्यूजियम को देखा।
बीकानेर में पर्यटन विकास को बढ़ावा देने के लिए यह म्यूजियम तैयार किया जा रहा है। निर्माण कार्य पूरा होने वाला है। सितंबर में इसे सैलानियों और आमजनता के लिए खोल दिया जाएगा। यह नया पर्यटन स्थल बनेगा।
-हनुमंतसिंह दाऊदसर, ट्रस्टी, महाराजा गंगासिंहजी ट्रस्ट