बीकानेर/ नोखा.
कोलकाता में लगी आग ने बीकानेर जिले के करीब 200 परिवारों को करोड़ों का नुकसान हुआ है। इनमें सबसे अधिक परिवार नापासर और सींथल के है। इसके अलावा नोखा और बीकानेर के भी ऐसे कई परिवार प्रभावित हुए हैं जो कोलकाता में व्यापार करते हैं। बीकानेर के दफ्तरी चौक के मूल निवासी सुनील, अनिल और संजय दफ्तरी की कोलाकाता के व्यस्ततम व्यावसायिक इलाके बड़ा बाजार में दुकान थी।
टेलरिंग मेटेरियल का काम करने वाले इन भाइयों की दुकान में काफी स्टॉक था। आग लगने के बाद रात करीब एक से चार बजे के बीच इन्होंने 50 फीसदी माल बाहर निकाल लिया लेकिन इसके बाद कोलाकाता पुलिस ने घटनास्थल पर किसी को भी जाने नहीं दिया। ऐसे में उनका सारा माल जल गया।
इसके अलावा नोखा के द्वारकाप्रसाद चांडक, बाबूलाल चांडक, देवकिशन चाडंक, जांगलू के मूलचंद चाडंक, बेरासर के पवन मालानी, चंपालाल, सत्यनारायण मालानी, भीनासर के सुरेन्द्र डागा, मोतीलाल मीनाणी, ओमजी सारड़ा, रामजी सारड़ा, श्यामलाल नीमाणी, कन्हैयालाल रामपुरिया, जयकिशन डागा,सींथल के हनुमानराम सीताराम बाहेती, जगदीश कुमार सुरेश कुमार, सीताराम माहेश्वरी, बालकिशन मालाणी, जगनदास किशन गोपाल, नापासर के कन्हैयालाल तापड़िया, माणक लाल तापड़िया, गिरधारीलाल झांवर, हनुमानदास झंवर, दुलचासर के लूणकरण मूंधड़ा आदि को आग से भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
भाजपा नेता मोहन सुराना ने भी कोलकाता में रहने वाले कई बीकानेर वासियों से बात की। सुराना ने बताया कि अधिकतर परिवार सदमे की स्थिति में है। कमाई के लिए घर छोड़ने वाले आज फुटपाथ पर आ गए है। आग से प्रभावित अधिकतर लोगों ने माल का बीमा तक नहीं करवाया था। रविवार को दिनभर लोग कोलकाता में अपने परिजनों से संपर्क कर स्थिति का पता लगाने में जुटे थे।
जीवनभर की कमाई, पलभर में खाक
नोखा के मूल निवासी रेवंतराम रांका नंदाराम कटला में व्यापार करते थे। दूरभाष पर हुई वार्ता में रांका ने बताया कि उनके जीवन भर की कमाई पलभर में स्वाह हो गई। कोलकाता में 10 साल नौकरी करने के बाद उन्होंने 1979 में रांका इंटरप्राइजेज के नाम से दुकान शुरू की थी। मेहनत के बाद कासीराम ब्लॉक में 10 तल पर दो दुकानें बनाई। दुकान में करीब 70 लाख का माल था जो राख हो गया।