जोधपुर.
संडे को मेडिकल कॉलेज से संबंधित अस्पतालों की स्थिति भी छुट्टी जैसी ही रहती है। वार्डो से अधिकांश कर्मचारी नदारद रहते हैं। मरीज के परिजनों को जरुरत पड़ने पर ड्यूटी स्टाफ को खोज कर लाना पड़ता है।अस्पताल परिसर की सफाई भी नहीं की जाती है। जिसके कारण जगह-जगह गंदगी का ढेर लगा रहता है।
‘भास्कर’ टीम ने डा. एसएन मेडिकल कालेज से जुड़े महात्मा गांधी, मथुरादास माथुर और उम्मेद अस्पताल में फैली इन अव्यवस्थाओं को देखा और अपने कैमरे में कैद किया। इतना ही नहीं अस्पताल परिसर में पड़े मेडिकल वेस्ट का भी निस्तारण नहीं किया जाता है। इस कारण अस्पताल परिसर में दरुगध फैली रहती है। जिस कारण वहां से गुजरने वालों को मुंह पर कपड़ा लगाना पड़ता है।
सिक्यूरिटी स्टाफ की गैर मौजूदगी के कारण लोगों का हुजूम बेधड़क इधर-उधर घूमता फिरता है और ऐसे लोगों को कोई रोकने वाला नहीं है। वार्डो में लोग चौपाल लगाए बैठे रहते हैं मगर कोई उन्हें वहां से हटाने वाला नहीं। भीड़ के शोर से मरीजों को परेशानी होती है मगर वो अपनी व्यथा कहें तो किसे, कोई सुनने वाला ही नहीं है।
हमारे अस्पताल अधीक्षक और उप अधीक्षक व्यवस्था को बनाने की कोशिश करते हैं। स्टाफ की कमी के कारण कभी कभार ऐसी समस्या आ जाती है। जिनकी जानकारी मिलने पर शीघ्र ही निस्तारण कर देते हैं।
—डॉ. पीके गुप्ता, प्राचार्य,एसएन मेडिकल कालेज
उम्मेद अस्पताल
समय : दोपहर 2.50 बजे
पोस्ट नेटल वार्ड
वार्ड के अंदर भारी भीड़ थी। लोगों के बोलने से शोर दूर तक सुनाई दे रहा था। अंदर स्टाफ नदारद था। वार्ड के बाहर ही गंदे बेड शीट, गद्दे और कपड़े रखे हुए थे। वहां से इस कदर बदबू आ रही थी कि कोई पास में खड़ा ही नहीं रह सकता है। वार्ड के लोगों ने वहां से हटाने की सफाई कर्मियों से गुहार भी लगाई मगर उन्होंने अपना काम नहीं होने का कहते हुए मना कर दिया।
स्टरलाइजेशन वार्ड
वार्ड के एक कोने को स्टोर रूम बना रखा था, जहां पर गंदे बेड शीट और गंदे कपड़े रखे हुए थे। वहीं ड्रेसिंग टेबल के आसपास खून से सनी पट्टियां आदि बिखरी हुई पड़ी थी। वार्ड में सुबह से कोई सफाई कर्मी नहीं आया। इस कारण पूरा वार्ड गंदगी से अटा हुआ पड़ा था। मेडिकल वेस्ट से भरे कचरा पात्र भी एक कोने में पड़े थे।
एमडीएम अस्पताल
समय : दोपहर 2.00 बजे
ट्रोमा सेंटर
आईसीयू और वार्ड एक घंटे से सूने पड़े हुए थे। मरीजों के परिजन खुद स्टाफ के आने का इंतजार कर रहे थे। आईसीयू में कचरा पात्र गंदगी से भरे हुए थे। जिसके कारण पूरा आईसीयू बदबू मार रहा था। ऐसा ही हाल दोनों वार्ड के थे। वार्ड में लोगों की भारी भीड़ जमा थी। इस कारण कई मरीजों को भी दिक्कत हो रही थी मगर भीड़ को वहां से निकालने वाला कोई नहीं था।
क्या था आलम
वार्ड में जगह जगह गंदगी फैली हुई थी। मरीज के परिजनों ने बताया कि सुबह से कोई सफाई करने ही नहीं आया। दो दिनों का मेडिकल वेस्ट वार्ड में ही एकत्रित किया हुआ खुले डिब्बों में पड़ा था। जिस पर कीड़े व मक्खियां मंडरा रहे थे। यहां पर भी कोई स्टाफ कर्मी मौजूद नहीं था। लोगों की भीड़ वार्ड में एकत्रित थी। भीड़ के कारण खाफी शोर हो रहा था।
महात्मा गांधी अस्पताल
समय : दोपहर 2.30 बजे
सर्जिकल वार्ड
खून से सनी हुई पटिट्यां खुले में ही पड़ी थी। वहीं मेडिकल वेस्ट भी खुले पात्र में ही पड़ा था। सुबह डिस्चार्ज किए गए मरीजों की गंदी बेड शीट भी एकत्रित की हुई वहीं पड़ी थी, जिसके पर मक्खियां भनभना रही थी। वार्ड में कोई स्टाफ मौजूद नहीं था। मरीजों के पलंग पर लोग बिना रोकटोक के बैठे गप्पे मार रहे थे।
बर्न वार्ड
वार्ड परिसर में ही मेडिकल वेस्ट से भरे कचरा पात्र रखे हुए थे। खुले में पड़ा मेडिकल वेस्ट के पास ही वाशबेसिन था। गत दो दिनों का कचरा वहीं पर एकत्रित किया हुआ पड़ा था। वार्ड में भर्ती झुलसे हुए मरीजों की मरहम पट्टी करने के बाद कई परिजन खून से सनी गॉज खुले पड़े कचरा पात्रों में डाल रहे थे। इसके साथ ही परिजन व मरीज बचे हुए खाने-पीने के सामान को भी वार्ड में ही फेंक रहे थे।