पानीपत. अटारी एक्सप्रेस कांड की साजिश इंदौर में ही रची गई थी। इसका खुलासा खुफिया एजेंसियों की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों से हुआ है। हालांकि जांच प्रभावित होने की आशंका से इस तथ्य का खुलासा नहीं किया गया है।
18 फरवरी 2007 को अटारी एक्सप्रेस में हुए ब्लास्ट के बाद से ही जीआरपी व अन्य एजेंसियां जांच में लगी हुई हैं। इस जांच में यह बात साफ हो गई है अटारी विस्फोट में प्रयुक्त की गई बोतलें, सूटकेस, सूटकेस-कवर तथा अन्य सामान इन्दौर के कोठारी मार्केट से एक किलोमीटर के दायरे में अलग-अलग दुकानों से खरीदे गए थे।
इनसे पूछताछ के बाद सूटकेस-कवर सिलने वाले अभिनंदन बैग स्टोर के मालिक हुफैजा व मैनेजर पूनम ठाकुर का जीआरपी की सीआईए टीम ने बैंगलूर में नारको टेस्ट कराया था, पर सूत्र इसे भी निल बता रहे हैं।
सीआईए टीम के मुखिया इंस्पेक्टर गुरदीप सिंह का कहना है कि यह सारा सामान इन्दौर में एक किलोमीटर के दायरे में उपलब्ध है और वहीं से इसके खरीदे जाने की जानकारी मिली है।
फोटो नहीं पहचान रहे दुकानदार :
जीआरपी टीम की इन्दौर में कुछ लोग मदद भी कर रहे हैं। इन लोगों ने संदिग्ध गतिविधियों में शामिल रहे लोगों के फोटो भी जीआरपी को उपलब्ध कराए हैं। इसके अलावा इन्दौर पुलिस से भी फोटो मिले हैं। जीआरपी ने सभी फोटो को सामान विक्रेताओं को दिखाया पर वह लोग फोटो से पहचान नहीं कर पा रहे हैं। जीआरपी को इस कांड में सिमी के हाथ होने की आशंका है।