भोपाल.प्रदेश के नगरीय निकायों के चुनाव में अब पार्षद बेहिसाब खर्च नहीं कर सकेंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने पार्षदों व सदस्यों के चुनार्वी खर्च पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। इसके चलते पार्षदों व सदस्यों को चुनावी खर्च का लेखा-जोखा देना पड़ सकता है। अभी तक सिर्फ महापौर व अध्यक्षों को ही चुनावी खर्च का ब्योरा देना अनिवार्य है।
वर्तमान में प्रदेश के नगर-निगम, नगर पालिका और जनपद पंचायतों के चुनाव में पार्षद व सदस्यों के चुनावी खर्च पर कोई नियंत्रण नहीं होता है। महापौर और अध्यक्षों के चुनावी खर्च की लिमिट रहती है और उन्हें खर्च का ब्योरा भी देना पड़ता है, लेकिन पार्षद-सदस्य इस दायरे से बाहर हैं। इस कारण कई पाषर्द और सदस्य अपने खर्च से अपने समर्थित महापौर और अध्यक्षों का भी चुनाव प्रचार करते हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग ने इस बेहिसाब चुनावी खर्च को नियंत्रण में लेने की पुख्ता तैयारी कर ली है। सूत्रों के मुताबिक आयोग ने राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा है कि सभी पार्षद और सदस्यों द्वारा चुनावी खर्च की लिमिट तय करके खर्च का ब्योरा देना अनिवार्य किया जाए।
किस आधार पर बदलाव
नवंबर में कोलार नगर-पालिका चुनाव के बाद बड़े पैमाने पर नागरिकों ने शिकायत की थी कि कतिपय पार्षदों ने अध्यक्ष का भी प्रचार किया। पूर्व में भी ऐसी शिकायतें अन्य चुनावों के दौरान मिली थीं। इस कारण निर्वाचन आयोग ने चुनावी खर्च के नए नियम बनाने का फैसला किया।
किन पर होगा प्रभाव
किसी भी नगरीय निकाय में पार्षद और सदस्यों के चुनाव होते हैं, वहां खर्च नियंत्रण का नियम लागू होगा। इसके दायरे में 14 नगर-निगमों के चुनाव,86 नपा के चुनाव और 48 जिला पंचायतों के चुनाव शामिल हैं।
हमने राज्य सरकार को प्रस्ताव बनाकर भेजा है। इसमें प्रस्तावित किया गया है कि पाषर्द व सदस्यों के चुनावी खर्च को नियंत्रण में लिया जाए। इस प्रस्ताव पर फैसला अब राज्य सरकार को करना है।
- आदित्य विजय सिंह, आयुक्त, राज्य निर्वाचन आयोग
पाषर्द-सदस्यों के चुनार्वी खर्च पर नियंत्रण करने का निर्वाचन आयोग का अच्छा कदम है। इससे चुनाव में होने वाले अनाप-शनाप खर्च पर रोक लगेगी।
- आलोक संजर, भाजपा पार्षद, भोपाल नगर-निगम
चुनावी खर्च पर नियंत्रण करने से गलत तरीके से होने वाले खर्च पर अंकुश लगेगा। इसका सही तरीके से क्रियान्वयन होना चाहिए।
- सलीम अहमद, कांग्रेस पार्षद, भोपाल नगर-निगम