भोपाल. राजधानी स्थित संस्कार वैली स्कूल के बच्चे अब एशिया रीजन में होने वाले समाज सेवा के कामों में भाग ले सकेंगे। इसके अलावा यहां के विद्यार्थी और शिक्षक एशिया रीजन के चुनिंदा स्कूलों के नियमित संपर्क में भी रहेंगे।
संस्कार वैली स्कूल को विश्व स्तर के 61 चुनिंदा स्कूलों की संस्था राउंड स्क्वायर एसोसिएशन की एशिया रीजन की सदस्यता मिलने से यह संभव हुआ है। इसकी सदस्यता मिलने वाला यह प्रदेश का दूसरा स्कूल है।
इसके साथ ही संस्कार वैली स्कूल ने महज दो साल की अवधि में देश भर के चुनिंदा दस स्कूलों में अपना स्थान बना लिया है। शनिवार को संस्कार वैली स्कूल में आयोजित राउंड स्क्वायर की एशिया रीजन की कांफ्रेंस में एशिया रीजन कमेटी के अंतरराष्ट्रीय सदस्य सुमेर सिंह ने सदस्यता देने के आवेदन पर मंजूरी दी।
चयनकर्ताओं ने संस्कार वैली स्कूल में पिछले दो सालों में कराए गए व्यक्तित्व विकास के आयोजनों और बच्चों से करवाए गए समाज सेवा के कामों को देखते हुए सदस्यता के लिए चुना है। अंतरराष्ट्रीय सदस्यता को पाने के लिए 25 स्कूलों ने आवेदन किया था, जिसमें से इस साल केवल दो का चयन किया गया है।
स्कूल प्रबंधन और प्राचार्य के विचारों और कार्यशैली को एसोसिएशन के उद्देश्यों के समान देख कर ही यहां कांफ्रेंस करने की अनुमति भी दी गई। कांफ्रेंस में देश-विदेश के चुनिंदा 19 स्कूलों के प्रतिनिधियों और प्राचार्र्यो ने भाग लिया।
छात्रवृत्ति भी मिलेगी
कांफ्रेंस में आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभाशाली बच्चों और शिक्षकों को छात्रवृत्ति दिए जाने का फैसला भी लिया गया। राउंड स्क्वायर एसोसिएशन की सहयोगी संस्था फ्रेंड्स राउंड स्क्वायर द्वारा यह छात्रवृत्ति दी जाएगी। इसके सदस्य स्कूल आपस में चंदा करके एक कारपस फंड इकट्ठा करेंगे।
छात्रवृत्ति योजना की घोषणा के साथ ही इसके लिए 11 लाख रुपए इकट्ठे भी हो गए। शुरुआती तौर पर फ्रेंड्स राउंड स्क्वायर के अध्यक्ष अनूप विश्नोई ने पांच लाख, संस्कार वैली स्कूल की निदेशक ज्योति अग्रवाल ने पांच लाख और संस्कार वैली स्कूल के प्राचार्य जयंती हरिहरलाल ने एक लाख रुपए इस फंड में जमा कराए हैं।
क्या है राउंड स्क्वायर एसोसिएशन
राउंड स्क्वायर एसोसिएशन में शामिल पांच महाद्वीपों के 61 स्कूल व्यक्तित्व विकास और अंतरराष्ट्रीय विचारधारा को आपस में बांटते हैं और इसे पूरा करने की जिम्मेदारी निभाते हैं। इसका सामूहिक उद्देश्य हर छात्र को एक संपूर्ण व्यक्ति के रूप में तैयार करना है, जिससे अभिजात्य वर्ग के बच्चों में गरीब बच्चों की मदद करने की भावना का विकास हो सके।
संस्था का सदस्य बनने से अब संस्कार वैली स्कूल भी एशिया के अन्य स्कूलों के साथ मिलकर सेवा योजनाओं, वार्षिक सम्मेलनों, आपसी आदान-प्रदान और अन्य कार्यक्रमों में भाग ले सकेगा।
ये भी शामिल हुए कान्फ्रेंस में
0 ओपीपी सिंह, आसाम वैली स्कूल 0 मिशेल गजधर, श्याम डोरे, मिलेनियम स्कूल दुबई 0 एस कुमार, मेयो कालेज अजमेर 0 दमन दुग्गल, विवेक हाईस्कूल 0 वीके वर्मा, बीएन तिवारी, एमएनएसएस राई 0 कारना पुरी, वेलहेम ब्वायज 0 मीनाक्षी सोलोमन, लारेंस स्कूल 0 श्री बिंद्र, वीडीजेएस 0 जी भोई, वीडीजेएस 0 सरिता कासलीवाल।
होनहार बच्चों के लिए
फ्रेंड्स राउंड स्कवायर के अध्यक्ष अनूप विश्नोई का कहना है कि कोई भी स्कूल बिल्डिंग से बड़ा नहीं होता, बल्कि उसमें पढ़ने वाले बच्चों के विचारों और कामों से बड़ा होता है। इस एसोसिएशन का उद्देश्य स्कूलों को इसी स्तर पर बड़ा बनाना है।
श्री विश्नाई ने बताया कि छात्रवृत्ति का लाभ होनहार बच्चों और शिक्षकों दोनों को दिया जाएगा। पचास हजार से एक लाख रुपए तक पढ़ाई या अन्य गतिविधि का खर्च छात्रवृत्ति के माध्यम से संस्था उठाएगी।
बच्चों की संस्था
राउंड स्क्वायर के समिति सदस्य और एशिया पेसिफिक रीजन के प्रतिनिधि सुमेर सिंह ने बताया कि यह पहली संस्था है जिसके वार्षिक बैठकों और कार्यक्रमों में आधे से ज्यादा स्कूली बच्चे शामिल होते हैं।
श्री सिंह ने बताया कि स्कूल चाहे किसी भी बोर्ड से संबद्ध हो या किसी भी पैटर्न की शिक्षा देने वाला हो, व्यक्तित्व निर्माण के छह स्तंभों को पालन करने वाले स्कूलों को ही इसका सदस्य बनाया जाता है। श्री सिंह ने बताया कि जर्मनी के जाने माने शिक्षाविद् और दार्शनिक डा. कर्ट हान की परिकल्पना के आधार पर इसकी स्थापना की गई है।
>> यहां का माहौल बहुत ही अच्छा है और आधुनिक संसाधनों से युक्त स्कूल है। यहां के बच्चों में आत्म-विश्वास नजर आता है।
अरविंद चालासानी, दून स्कूल
>> बेहद खूबसूरत स्कूल है। दो साल पहले भी देखा था, तब से अब तक हुए विकास के आधार पर लग रहा है कि यह अगले पांच सालों में देश के उत्कृष्ट स्कूलों में गिना जाएगा।
प्रमोद शर्मा, मेयो कालेज, अजमेर
>> यहां के आसपास का प्राकृतिक वातावरण भी बहुत अच्छा है, यहां के बच्चे भी खुश नजर आ रहे हैं। जाहिर है यहां उन्हें अच्छा माहौल मिल रहा है।
दमन दुग्गल, विवेक हाई स्कूल, चंडीगढ