आर्मी डे
सर्वोपरि है देश की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण। फिर उन जवानों का सम्मान, कल्याण और सुरक्षा जो आपकी कमान में मर मिटने को तैयार हैं। सबसे आखिर में खुद की सुरक्षा। चेटवुड हाल (इंडियन मिल्ट्री अकादमी) में छपी यह पंक्तियां सेना की महानता को बाखूबी बयान करती हैं।
सरहदों पर अवाम की हिफाजत के लिए खड़े इन जांबाजों के लिए पैसा मायने नहीं रखता। इनके दिल है तो बस देश के लिए कुछ करने का जज्बा। जिस्म पर सेना की वर्दी पहनने के बाद दिल में पैदा होने वाला जोश और मिलने वाला सम्मान जवानों के लिए सबसे बड़ी सौगात है। इसी सौगात को संभालकर दशकों से भारतीय सेना के जवान अपना खून बहा रहे हैं।
आर्मी बैकग्राउंड करता था आकर्षित
रिटायर्ड जनरल वीपी मलिक अपनी याद को ताजा कर बताते हैं कि आर्मी बैकग्राउंड होने से उन्हें सेना शुरू से ही आकर्षित करती थी। उन्होंने बताया कि सेना ही एकमात्र संस्थान है जहां युवाओं के अनुशासन, ईमानदारी, साहस, नेतृत्व जैसे मानकों को जांच परख कर उन्हें शामिल किया जाता है।
वर्दी और वर्दी की महानता
सेना में शामिल होने वाले के लिए पैसा या आराम कभी सपने में भी नहीं आता। आसमान की खुली छत और बॉर्डर पर दुश्मन से लड़ने का सपना ही हर सैनिक के दिलो दिमाग में होता है। ले. जनरल जेके मल्होत्रा का मानना है कि वर्दी और वर्दी की महानता दो चीजें है, जिनका आकर्षण होना यंगस्टर्स में जरूरी है। देश के लिए मर मिटने का जज्बा उन्हें यहां खींच कर लाया। हाई सैलरी पैकेज कभी भी एक सैनिक के आत्मसम्मान के सामने मायने नहीं रखता, अगर ऐसा होता तो एसएसबी के लिए हर साल लाखों आवेदक नहीं आते।
जवानी में थे कई विकल्प
डिफेंस मैनेजमेंट कॉलेज सिकंदराबाद के ग्रेजूएट ब्रिगेडियर केएस कालहों का कहना है कि उनके पास जवानी में कई विकल्प थे, लेकिन सीने पर मेडल और कंधो पर स्टार इस गर्व को हासिल करने के लिए वह सेना में आए। उन्होंने कहा कि जिस सोच के साथ वह सेना में आए थे, एक सैनिक की महानता का पता सेना में ही लगा।
आज भी नम हो जाती हैं आंखें
एक बड़ी प्लेसमेंट कंपनी में सीआईओ मेजर (रि.) दीपेंद्र सिंगर। बचपन से जवानी तक एक पेरा कमांडो बनने का सपना। सैनिक स्कूल से एनडीए और फिर पेरा कमांडो। २क्क्१ में आतंकी मुठभेड़ में गंभीर घायल होने के बाद सेना से सेवानिवृत हो गए।
दीपेंद्र का कहना है कि चाहे कॉपरेरेट जगत में वह जो भी ऊंचाई छू लें, लेकिन फौज उनकी रगों में है। उन्होंने बताया कि उनकी जिंदगी का सबसे दुखद दिन वही था जब चलने में अक्षम होने के कारण सेना छोड़नी पड़ी। आज भी सेना को याद कर उनकी आंखें नम हो जाती हैं।
वर्किग ऑफ आर्मी
चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ
कमांड (6)
जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ- ले.जनरलकोर (13)
जनरल ऑफिसर कमांडिंग ले जनरलडिवीजन (34)
जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल
ब्रिगेड कमांडिंग ऑफिसर ब्रिगेडियर, तीन बटालियनों की एक ब्रिगेड
बटालियन कमांडिंग ऑफिसर कर्नल, 900 सैनिक
कंपनी कंपनी कमांडर मेजर, 120 सैनिक
प्लाटून प्लाटून कमांडर लेफ्टिनेंट या सूबेदार, 32 सैनिक
सैक्शन सैक्शन कमांडर हवलदार, 10 सैनिक
रैंक रिटायरमेंट उम्रसिपाही/लांस नायक २४,२५३ ३५-३८
नायक ५,९0४ ४0
हवलदार १४४४८ ४२
नायब सूबेदार १९७१ ४४
सूबेदार ७२६क् ४६
सूबेदार मेजर १४0६८ ४९
सर्वाधिक एक्ससर्विसमेन वाले राज्य
यूपी २९५१९५
पंजाब २१८९३२
हरियाणा १६८८९८
महाराष्ट्र १६क्६१४
केरल १२८९६७
तमिलनाडू ११६८७क्
राजस्थान ११२६६६
हिमाचल प्रदेश ९६८७क्
सेना के समक्ष चुनौतियांशॉर्टेज ऑफ ऑफिसर: सेना के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऑफिसर की कमी है। सेना में १४,५क्क् ऑफिसर कम है। ऑफिसर्स की कमी इसलिए चिंता का विषय है, क्योंकि इस आंकड़े का ९क् फीसदी ११४५क् कैप्टन और मेजर रैंक के अधिकारियों का है। यंग ऑफिसर की कमी से आने वाले ५ साल में प्लाटून को कमान या तो सीनियर ऑफिसर करेंगे या फिर जेसीओज।
कम वेतन:
सेना में कम वेतन अब यंगस्टर्स को इस प्रोफेशन में आने से रोक रहा है। पूर्व चीफ आफ आर्मी स्टाफ जनरल जेजे सिंह ने १४ अप्रैल २क्क्७ को छठे वेतन आयोग के समक्ष यह वेतन ५ गुना बढ़ाने को लेकर प्रेजेंटेशन दी थी। यंगस्टर्स को आकर्षित करने के लिए सेना के समक्ष यह सबसे बढ़ी चुनौती है।
प्रिमैच्योर रिटायरमेंट:
वर्ष 2000 से सेना के समक्ष एक नई समस्या उभर के आई, वह है प्रिमैच्योर रिटायरमेंट। बीते तीन सालों में लगभग ५ हजार से अधिक ऑफिसर्स ने रिटायर्मेट के लिए आवेदन कर चुके हैं।
मार्डन टेक्नोलॉजी:
कारगिल युद्ध के बाद सेना को आर्टिलरी, आर्मड, एयर डिफेंस और एविएशन और मैकेनाइजड इन्फेंट्री को आधुनिक करने की जरूरत महसूस हुई। सेना को १५५ एमएम की ४क्क् तोपों और इतनी ही १३क् एमएम की जरूरत है। एयरडिफेंस के लिए ३क्क् और इंसास राइफल के बदले कारगर राइफल, लेकिन कारगिल के बाद रक्षा बजट में ४२ फीसदी बढ़ोतरी के बाद भी अभी तक टेंडर ही निकाला गया है।
अंतरकलह:
सेना में सुसाइड और दूसरे सहयोगी को मारने के मामले में बढ़ोतरी हुई है। बीते पांच सालों में ४५६ सुसाइड जबकि २क्क्७ में १६२ मामले हैं। जबकि सहयोगी सीनियर अधिकारियों का मारने के मामले ७ फीसदी की दर से बढ़ रहे हैं। डिफेंस इंस्टीटच्यूट ऑफ साइकोलॉजिकल रिसर्च के लिए यह सबसे बढ़ी चुनौती है।
भ्रष्टाचार:
सेना में भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के मामले बढ़ रहे हैं। कारगिल युद्ध के बाद कोफिन घोटाले से भ्रष्टाचार के मामलों का खुलासा हुआ। इन आठ सालों में ३ मेजर जनरल और ब्रिगेडियर सहित और ७ कर्नल रैंक के अधिकारी शामिल कोर्ट मार्शल हो चुके हैं।
इंडियन आर्मी१८ इन्फेंट्री डिवीजन
४ रैपिड आर्मी डिवीजन
१क् माउंटेन डिवीजन
३ आर्मड डिवीजन
२ आर्टिल्री डिवीजन
६ एयर डिफेंस ब्रिगेड्स
२ स्र्फेस टू एयर मिसाइल ग्रुप
५ इंडिपेंडेंट आर्मड ब्रिगेड
१५ इंडिपेंडेंट आर्टिल्री ब्रिगेड
७ इंडिपेंडेंट इन्फेंट्री ब्रिगेड
१ पैराशूट ब्रिगेड
4 इंजीनियर ब्रिगेड
14 एविएशन हैलीकॉप्टर यूनिट
६३ टैंक रेजिमेंट
७ एयरबोर्न बटालियन
२क्क् आर्टिलरी रेजिमेंट
३६क् इंफेंट्री बटालियन
५ पेरा बटालियन
४क् मैकेनाइजड इंफेंट्री बटालियन
२क् कॉम्बेट हैलीकॉप्टर यूनिट्स
३६ एयर डिफेंस रेजिमेंट्स
विश्व की दूसरी सबसे बड़ी सेना
सेना की संख्या: १४ लाख १५ हजार
रिजर्व फोर्स: १२ लाख
टेरिटोरियल आर्मी: २ लाख
टैंक: ५क्क्क्, विजेंयता, टी-५५, टी-७२ अजेय, टी-९क् भीष्म और एमबीटी अर्जुन
आर्टिल्री: १३,000, १५५ एमएम बोफोर्स, 105 एमएम अबोट, १३क् एमएम हाउटजर, एम-४६, डी-३क् और १क्५ एमएम, पिनाका, स्मर्च ९के ५८ एमबीआरएल, बीएम-२१
क्रूज मिसाइल: ब्रह्महोस
एयरक्राफ्ट: ध्रुव, चीता, यूएवी
सर्फेस टू एयर मिजाइल: पृथ्वी-१, अगिA-१,२ और ३, आकाश, एसए-६, त्रिशूल, ओसा एकेएम
टॉप 5 आर्मीजयूएन मिशन की रिपोर्ट में भारतीय सेना दुनिया की बेस्ट आर्मीज में शुमार है। भारतीय सेना मध्य अफ्रीका, यूरोप और मध्य ऐशिया में यूएन द्वारा चलाए जा रहे शांति अभियानों में भाग लेती रही है..
चीन 17 लाख
भारत 14.5 लाख
नार्थ कोरिया 9 लाख
साउथ कोरिया 5.6 लाख
पाकिस्तान 5.25 लाख
प्रस्तुति: अरुणोश पठानियां / डिजाइनिंग: सुखदेव भंडारी